भारत की भर्ती प्रक्रियाः यूपीएससी और चयन बोर्ड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जरूरत

देश के युवाओं में यह धारणा आम है कि अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर सरकारी नौकरी पाना बेहद कठिन है। कई बार तोड़फोड़, आगजनी, हड़ताल और आत्मदाह जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। कई राज्यों में, चाहे वह बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल या कोई अन्य, चयन प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं और नतीजों को रद्द कर पुनः परीक्षा करानी पड़ी है। ऐसे में एआई को अपनाकर युवाओं की अविश्वास की भावना दूर हो सकती है।

Sep 10, 2025 - 13:07
 0
भारत की भर्ती प्रक्रियाः यूपीएससी और चयन बोर्ड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जरूरत

-डॉ. (लेफ्टिनेंट कर्नल) राजेश चौहान-

भारत में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से विवादों और प्रश्नचिह्नों से घिरी रही है। पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी के आरोप अक्सर लगाए जाते रहे हैं। कभी भाई-भतीजावाद, तो कभी धांधली की आहट ने युवाओं का विश्वास डगमगाया है। यही वजह है कि समय-समय पर हड़तालें, तोड़फोड़ और यहां तक कि आत्मदाह जैसी दर्दनाक घटनाएं भी सामने आई हैं। प्रश्न यह है कि क्या अब भी हम पुरानी पद्धतियों पर टिके रहें या नई तकनीक की ओर साहसिक कदम बढ़ाएं?

आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का है। शिक्षा से लेकर उद्योग और प्रशासन तक, हर क्षेत्र में इसका असर दिखाई दे रहा है। जब दुनिया के कई देश भर्ती प्रक्रिया में एआई का इस्तेमाल कर चुके हैं, तो भारत क्यों पीछे रहे? यूपीएससी और प्रादेशिक चयन बोर्डों में इंटरव्यू प्रक्रिया में यदि एआई का उपयोग हो, तो चयन अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बन सकता है।

सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि भाई-भतीजावाद और पक्षपात पर रोक लगेगी। अब तक ऐसे आरोपों ने संस्थाओं की साख पर आघात किया है। यदि एआई की निगरानी और विश्लेषणात्मक क्षमता का उपयोग किया जाए, तो किसी भी उम्मीदवार का मूल्यांकन केवल उसकी योग्यता के आधार पर होगा।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है। यदि चयन के हर चरण को विशेषज्ञों, पर्यवेक्षकों और मीडिया तक खुला रखा जाए और एआई आधारित डेटा एनालिसिस से उसकी पुष्टि हो, तो संदेह की गुंजाइश ही नहीं बचेगी। यह न केवल चयनित उम्मीदवारों का मनोबल बढ़ाएगा, बल्कि असफल रहने वालों को भी यह भरोसा देगा कि उन्हें निष्पक्ष अवसर मिला।

भारत में बार-बार चयन परिणाम रद्द होने और नई परीक्षाएं कराने की नौबत आई है। इससे केवल समय और संसाधनों की बर्बादी ही नहीं होती, बल्कि युवाओं का धैर्य और विश्वास भी टूटता है। अब समय है कि तकनीक को अपनाया जाए। भर्ती प्रक्रिया में एआई का उपयोग न केवल समस्याओं का समाधान देगा, बल्कि देश की सबसे बड़ी ताकत, युवाओं को यह संदेश भी देगा कि उनकी मेहनत का सही मूल्यांकन होगा।

युवाओं के भविष्य और देश की विश्वसनीय संस्थाओं की साख को ध्यान में रखते हुए यह पहल अत्यंत आवश्यक है। सरकार और आयोगों को अब संकोच छोड़कर साहसिक कदम उठाना चाहिए।

 -(लेखक "रायटर्स" द्वारा प्रमाणित हैं और कई पुस्तकों के लेखक हैं।

SP_Singh AURGURU Editor