एच-1बी वीजा पर अमेरिकी एक्शन पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया, कहा- इसका मानवीय असर होगा
नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा एच-1बी वीजा पर हर साल 1 लाख डॉलर फीस लगाने के फैसले पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि इस कदम के 'मानवीय असर' पड़ सकते हैं। खासकर उन परिवारों पर जिनकी ज़िंदगी इससे जुड़ी हुई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार इस फैसले के असर का अध्ययन कर रही है। इसमें भारतीय उद्योग जगत भी शामिल है, जिसने पहले ही इस पर शुरुआती विश्लेषण पेश किया है और एच-1बी वीजा को लेकर कई भ्रांतियों को साफ किया है।
मंत्रालय ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों ही इनोवेशन और रचनात्मकता में साझेदार हैं। इसलिए उम्मीद है कि दोनों देश आगे के रास्ते पर मिलकर चर्चा करेंगे। भारत ने यह भी कहा कि कुशल पेशेवरों का आना-जाना तकनीकी विकास, इनोवेशन, आर्थिक वृद्धि और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में अहम योगदान देता है।
विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इतनी भारी फीस से परिवारों पर गंभीर असर होगा। बहुत से लोग अमेरिका में अपने परिवारों के साथ बसे हैं और यह फैसला उनकी ज़िंदगी में बड़ी मुश्किलें ला सकता है.। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को यह नया आदेश जारी किया, जिसके तहत अब एच-1बी वीजा की सालाना फीस 1 लाख डॉलर होगी। यह कदम अमेरिका की कड़ी इमिग्रेशन पॉलिसी का हिस्सा बताया जा रहा है।
भारत के नागरिकों पर इस फैसले का सबसे ज्यादा असर होगा क्योंकि एच-1बी वीजा धारकों में 71% भारतीय हैं। फिलहाल करीब 3 लाख भारतीय प्रोफेशनल्स अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम कर रहे हैं, जिनमें अधिकतर आईटी सेक्टर से जुड़े हैं।
एक विश्लेषण के मुताबिक, यह फैसला एच-1बी वीजा प्रोग्राम को लगभग खत्म कर देगा। नई फीस एक नए एच-1बी वीजा धारक की औसत सालाना सैलरी से भी ज्यादा है और मौजूदा वीजा धारकों की 80% औसत आय के करीब है।