भारतीय सौंदर्यशास्त्र को वैश्विक मंच देने की पहल: डीईआई में पाठ्यक्रम को बौद्धिक रूप से समृद्ध बनाने पर हुआ मंथन
भारतीय सौंदर्यशास्त्र की सुदीर्घ, समृद्ध और दार्शनिक परंपरा को समकालीन अकादमिक ढांचे में स्थापित करने की दिशा में दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीईआई), आगरा ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। आचार्य आनंद कुमारस्वामी के सौंदर्य-दर्शन को केंद्र में रखते हुए संस्कृत विभाग द्वारा स्वयं मूक्स पीजी कार्यक्रम के अंतर्गत पाठ्यक्रम विकास के प्रथम चरण के रूप में एकदिवसीय राष्ट्रीय अकादमिक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित विद्वानों और विशेषज्ञों ने सहभागिता कर पाठ्यक्रम को बौद्धिक रूप से समृद्ध बनाने पर गंभीर विमर्श किया।
आगरा। दयालबाग शिक्षण संस्थान के कला संकाय अंतर्गत संस्कृत विभाग द्वारा 7 फरवरी 2026 को प्रातः 11 बजे से स्कूल ऑफ एजुकेशन के कॉन्फ्रेंस रूम में हाइब्रिड मोड में एकदिवसीय अकादमिक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला स्वयं मूक्स पी.जी. प्रोग्राम (संस्कृत) के लिए भारतीय सौंदर्यशास्त्र पर आधारित पाठ्यक्रम विकास के प्रथम चरण के रूप में आयोजित की गई।
कार्यशाला में ऑनलाइन माध्यम से मेघालय के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी (मेघालय के राज्यपाल के आयुक्त एवं सचिव) की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने भारतीय सौंदर्य-दृष्टि को दार्शनिक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं प्रत्यक्ष रूप से प्रो. सारिका वार्ष्णेय, चेयरपर्सन, संस्कृत विभाग, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय तथा प्रो. विजय कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य, आर.बी.एस. कॉलेज, आगरा ने अपने सारगर्भित वक्तव्यों से कार्यशाला को अकादमिक गहराई प्रदान की।
कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े विद्वानों ने ऑनलाइन सहभागिता की। इनमें बी.एच.यू. से प्रो. अभिमन्यु, नव नालन्दा महाविहार एवं संस्कृति मंत्रालय से डॉ. राजेश कुमार मिश्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डॉ. नंदिनी, दिल्ली विश्वविद्यालय से डॉ. कल्पना तथा पुणे के वरिष्ठ चित्रकार सुभाष बाभुलकर प्रमुख रहे। सभी विशेषज्ञों ने भारतीय सौंदर्यशास्त्र के सिद्धांतों, सौंदर्य-दर्शन की परंपरा, पाठ्यक्रम संरचना, विषय-वस्तु और शिक्षण-अधिगम पद्धतियों पर गंभीर एवं सार्थक विचार-विमर्श किया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भारतीय सौंदर्यशास्त्र की तात्त्विक अवधारणाओं तथा आचार्य आनंद कुमारस्वामी के चिंतन पर आधारित एक सुव्यवस्थित, समकालीन और अकादमिक दृष्टि से सुदृढ़ पी.जी. पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करना रहा। चर्चा के दौरान विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सुझावों को पाठ्यक्रम विकास प्रक्रिया में सम्मिलित करने पर सर्वसम्मति व्यक्त की गई, जिससे स्वयं मूक्स पी.जी. कार्यक्रम को ठोस दिशा और गति मिल सके।
इस अकादमिक कार्यशाला का संचालन एवं पाठ्यक्रम विकास का समन्वय संस्कृत विभाग, कला संकाय, डी.ई.आई. के पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. निशीथ गौड़ द्वारा किया गया। डीईआई के निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन ने पाठ्यक्रम निर्माण हेतु शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव का स्थान नहीं ले सकती, प्रत्येक मनुष्य का अपना विशिष्ट और महत्वपूर्ण स्थान है।
कार्यक्रम में कला संकाय प्रमुख प्रो. संगीता सैनी, संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता, डॉ. पूजा, डॉ. रुबीना, डॉ. इंदु, डॉ. ब्रजराज, डॉ. नमस्या सहित अनेक प्राध्यापक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।