मोबाइल को माथे से लगाकर हो रही दिन की शुरूआत, सुबह—सवेरे दर्शन को नकद नहीं 'डिजिटल बोहनी'
आगरा। कभी सुबह—सवेरे किसी दुकानदार के दुकान खोलते ही आप पहुंचे हों तो शायद सुना हो आज तो बोहनी आपके हाथों हो रही है...। दरअसल दुकानदार सुबह तब तक किसी को उधार नहीं देते जब तक बोहनी में नकद नारायण के दर्शन न हो जाएं। दुकानदार जब इस बोहनी को लेते हैं तो शुभ कर्म के लिए दोनों आंखों से लगाते हैं माथे से लगाते हैं फिर कहीं जाकर गल्ले में रखते हैं। मगर बाजार में बदलाव देखिए कि अब यही काम मोबाइल से हो रहा है।
यूं बोहनी शब्द संस्कृत से निकला है, जिसका अर्थ होता है पहली कमाई, या दिन की पहली अच्छी आमद।मगर डिजिटल पेमेंट के आज के दौर में बोहनी ऑनलाइन भुगतान के जरिये भी होने लगी है। यहां आप क्यूआर स्कैन करके भुगतान करते हैं तो उसकी तस्दीक साउंड बॉक्स से आने वाली आवाज करती है। यानी अब बोहनी सिर्फ कैश की मोहताज नहीं रही। ऐसे में दुकानदारों की आदत भी बदल गई है। नकद बोहनी नहीं होती तो वे मोबाइल को ही माथे से लगाते हैं। गल्ले और मंदिर में रखते हैं और वापस से काम में लग जाते हैं। पीर कल्याणी क्षेत्र में मनीष का गिफ्ट आईटम्स का काम है। मनीष कहते हैं कि गिफ्ट के लिए लड़के लड़कियां बहुत आते हैं। वे नए जमाने के लोग हैं। ज्यादातर क्यूआर स्कैनर से ही पेमेंट करते हैं। ऐसे में उन्हें लौटा नहीं सकते।
बल्केश्वर में देवेंद्र की जनरल मर्चेंट की दुकान है। वे कहते हैं कि भारत में बोहनी में नकद की परंपरा है। ऐसे में अभिलाषा रहती है कि बोहनी नकद से हो। कई बार ऐसा होता है तो कई बार नहीं। ऐसे में ग्राहक को लौटाते नहीं है। दिन की पहली पेमेंट भी मोबाइल से आॅनलाइन रिसीव करते हैं। क्या करें यह बदलाव है तो इसे सीखना ही पड़ेगा।
वहीं ग्राहकों की मानें तो बल्केश्वर के ही शुभम कहते हैं कि आज के समय में घर से निकलते वक्त पर्स घर पर रह जाए, तब भी हमें कोई फिक्र नहीं होती, क्योंकि हम जानते हैं कि स्मार्टफोन ही अब हमारा पर्स बन गया है। मौजूदा समय में पेमेंट के लिए कैश के साथ यूपीआई भी काफी अच्छा ऑप्शन हो गया है। आप पांच रुपये से लेकर एक लाख रुपये प्रतिदिन तक की पेमेंट यूपीआई की मदद से कर सकते हैं।
कमलानगर के एक अस्पताल में काम करने वाले तुषार कहते हैं कि ऑनलाइन पेमेंट की जब भी बात आती है तो यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) का जिक्र होता ही है। 2016 से पहले तक यूपीआई एक अनजान शब्द था। आज इसका डंका बज रहा है।
सदर के रहने वाले धर्मेंद्र कहते हैं कि पहले जहां एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने में काफी समय लगता था। वहीं, अब कुछ मिनटों में आसानी से पेमेंट हो जाती है। यूपीआई ने काफी हद तक लेन-देन को आसान और सुरक्षित बना दिया है।
यूपीआई के बारे में
वैसे तो यूपीआई की शुरुआत 2016 में हुई थी, लेकिन इसे पहचान कोरोना महामारी के बाद मिली है। बाजार में यूपीआई की हिस्सेदारी 2021 में बढ़ी है। अधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2016-2017 में जहां यूपीआई के जरिये 36 फीसदी पेमेंट होती थी। वहीं, आज यूपीआई भुगतान दर 65 से 70 फीसदी तक पहुंच गई है।
ऑफलाइन खरीदारी में भी डिजिटल पेमेंट
लोग अब ऑफलाइन खरीदारी में भी डिजिटल पेमेंट का भरपूर इस्तेमाल करने लगे हैं। किसी को पटरी पर चाय पीनी हो या पान खाना हो और जेब में छुट्टे नहीं हैं। तब वह खटाक से डिजिटल पेमेंट कर देते हैं।
रिवार्ड भी एक कारण
वहीं डिजिटल पेमेंट करने वाले ऐप या साइट पर आमतौर पर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए रिवार्ड या कैशबैक दिया जाता है। यह भी लोगों को डिजिटल पेमेंट करने के लिए प्रेरित करता है।
कुछ लोग अब भी कतराते हैं
यूं तो पढ़े-लिखे लोग या सतर्क और जागरूक लोग आसानी से डिजिटल पेमेंट को अपना रहे हैं। लेकिन गांवों और छोटे शहरों में अभी भी लोग इसका उपयोग करने से हिचक रहे हैं। बहुत से लोग इंटरनेट से जुड़े मसलों के चलते डिजिटल के बजाय कैश पेमेंट को ही पसंद करते हैं।