अवैध शस्त्र लाइसेंस केस की जांच आगरा से हटाकर लखनऊ एसटीएफ को सौंपी गई
आगरा। शस्त्र लाइसेंस के मामले में दर्ज मुकदमे में अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित की शिकायत के बाद विवेचना लखनऊ एसटीएफ को ट्रांसफर कर दी गई है। वहां नए विवेचक ने यह विवेचना ग्रहण कर जांच शुरू कर दी है।
-पीड़ित की शिकायत के बाद बदली गई विवेचना, लखनऊ के इंस्पेक्टर ने विवेचना ग्रहण कर जांच शुरू की
आगरा के सिकंदरा क्षेत्र के निवासी विशाल भारद्वाज ने कुछ लोगों की मुख्यमंत्री से अवैध असलहा को लेकर शिकायत की थी। मुख्यमंत्री के आदेश पर मामले की जांच आगरा एसटीएफ को दी गई। आगरा एसटीएफ के इंस्पेक्टर यतीन्द्र शर्मा ने जांच शुरू भी की। कहा जा रहा है कि आरोपियों ने जांच के दौरान सहयोग नहीं किया और आवश्यक कागजात मुहैया नहीं कराए। इंस्पेक्टर यतीन्द्र शर्मा ने अपनी जांच में आशंका जताई कि यह मामला अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त का है, जिसमें हथियारों की तस्करी और कारतूस घोटाले के लिए शूटिंग खिलाड़ी बनाए जाते हैं।
इंस्पेक्टर यतीन्द्र शर्मा की तहरीर पर नाई की मंडी थाने में अवैध असलहा को लेकर धोखाधड़ी और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। मुकदमे में मोहम्मद जैद, नेशनल शूटर मोहम्मद अरशद, राजेश कुमार बघेल, भूपेंद्र, शोभित चतुर्वेदी और सेवानिवृत्त असलहा बाबू संजय कपूर नामजद हैं।
मोहम्मद जैद पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2003 में शस्त्र लाइसेंस बनवाया और शपथ पत्र में जन्मतिथि 1975 दर्शाई, जबकि अन्य प्रमाणपत्रों में 1972 दर्ज है। नेशनल शूटर अरशद खान के पास पांच लाइसेंस हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने प्रपत्रों में कम उम्र दर्शाकर खुद को कुशल निशानेबाज दिखाया, ताकि आराम से शस्त्र लाइसेंस बन सके। राजेश कुमार बघेल पर आरोप है कि उनके लाइसेंस से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले। उसी लाइसेंस पर शस्त्र खरीदे गए।
शोभित चतुर्वेदी ने फर्जी शपथपत्र दिया। उनके पास टिहरी उत्तराखंड से जारी एक लाइसेंस था, जिसे दूसरे लाइसेंस बनवाने में छिपाया। जन्मस्थान लखनऊ के बजाय आगरा दर्शाया। भूपेंद्र सारस्वत पर आरोप है कि 21 साल के नहीं थे, फिर भी शस्त्र लाइसेंस था। लाइसेंस वर्ष 2016-17 में गुम बताया गया। असलहा बाबू संजय कपूर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके हैं। उन पर कूट रचना, तथ्यों को छिपाना और असत्य शपथपत्र भेजने का आरोप है।
मामले में कई आरोपी हाईकोर्ट में राहत के लिए गए। कुछ को मिली, कुछ को नहीं। हाईकोर्ट ने विवेचना की समयसीमा जरूर निर्धारित की। विवेचना की सुस्त चाल को देखकर पीड़ित विशाल भारद्वाज ने एसटीएफ अधिकारियों से विवेचना बदलने की मांग की। मुख्यालय ने जांच लखनऊ एसटीएफ इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह को सौंप दी। उन्होंने आगरा आकर कई दस्तावेज मांगे हैं और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।