भारत स्थित ईरानी दूतावास ने अमेरिकी हमलों को बताया जंगल का कानून
नई दिल्ली। अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु स्थलों फोर्डो, नतांज और इस्फहान को खत्म कर दिया है। अमेरिका के बी-2 बॉम्बर्स ने करीब 13 हजार किलो के जीबीयू-57 बम ईरानी न्यूक्लियर ठिकानों पर गिराए हैं। सीएनएन की रिपोर्ट में 12 जीबीयू-57 बम गिराने की बात है तो कुछ अमेरिकी मीडिया में 6 बम गिराने का दावा किया गया है। फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं की गई है कितने कितने बम गिराए गए हैं। वहीं तीन परमाणु स्थलों पर हमले के बाद ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था ने एक तीखा और भावनात्मक बयान जारी किया है। भारत स्थित ईरानी दूतावास ने इस बयान को जारी किया है, जिसमें अमेरिका की सख्त शब्दों में निंदा करते हुए फिर से परमाणु कार्यक्रम शुरू करने की कसम खाई गई है।
ईरानी दूतावास की तरफ से जारी बयान में अमेरिका के इस हमले को 'जंगल का कानून' बताया गया है। इसके अलावा ईरान ने आईएईए की चुप्पी की निंदा करते हुए देश के 'परमाणु शहीदों' के नाम पर शपथ ली है और फिर से अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने की कसम खाई है। परमाणु सुविधाओं पर हमले के बाद ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन की तरफ से जारी बयान में अमेरिका की निंदा की गई है।
ईरानी दूतावास ने अपने बयान में कहा है कि "हाल के दिनों में जायोनी दुश्मन द्वारा किए गए क्रूर हमलों के बाद, आज सुबह फोर्डो, नतांज और इस्फहान में देश के परमाणु स्थलों पर बर्बर हमला किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों, विशेष रूप से एनपीटी का उल्लंघन है। यह कार्रवाई, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करती है, वो दुर्भाग्य से अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की उदासीनता और यहां तक कि मिलीभगत से हुई है। अमेरिकी दुश्मन ने वर्चुअल सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से और अपने राष्ट्रपति की घोषणा के द्वारा साइटों पर हमलों की जिम्मेदारी ली है, जो सुरक्षा समझौते और एनपीटी के मुताबिक लगातार आईएईए निगरानी के अधीन हैं। यह उम्मीद की जाती है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय "जंगल के नियमों" में निहित इस अराजकता की निंदा करेगा और ईरान को उसके वैध अधिकारों का दावा करने में समर्थन देगा।"
ईरानी दूतावास ने कहा है कि "ईरान का परमाणु ऊर्जा संगठन ईरान के महान राष्ट्र को आश्वस्त करता है कि अपने दुश्मनों की दुर्भावनापूर्ण साजिशों के बावजूद, हजारों क्रांतिकारी और प्रेरित वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के समर्पण के साथ, यह परमाणु शहीदों के खून पर बने इस राष्ट्रीय उद्योग के डेवलपमेंट को रुकने नहीं देगा। यह संगठन कानूनी कार्रवाइयों सहित महान ईरानी लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।" ईरान ने यह आरोप लगाया कि यह हमला उन ठिकानों पर किया गया है, जो पहले से ही अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण और निगरानी में थे और इसलिए यह कदम पूरी तरह अवैध और उकसावे की कार्यवाही है।