एनसीईआरटी बुक में भरतपुर राज्य को मराठाओं के अधीन दिखाने पर जाट महासभा का कड़ा विरोध
एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की 2025 की पुस्तक में भरतपुर राज्य को 1759 में मराठा साम्राज्य के अधीन दिखाने पर अखिल भारतीय जाट महासभा भड़क उठी है। संगठन ने इस ऐतिहासिक तथ्य को गलत बताते हुए इसे जाट समाज का अपमान करार दिया और सरकार से तुरंत सुधार की मांग की है।
आगरा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की 2025 की पुस्तक में भरतपुर राज्य को 1759 में मराठा साम्राज्य के अधीन दर्शाए जाने पर अखिल भारतीय जाट महासभा ने कड़ी आपत्ति जताई है।
महासभा के जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर, महामंत्री वीरेंद्र सिंह छोंकर, महानगर अध्यक्ष गजेंद्र सिंह नरवार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयप्रकाश चाहर, उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राणा, चौ. नवल सिंह, गुलवीर सिंह, युवा जिला अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष नरेश इन्दौलिया, मंत्री देवेंद्र चौधरी और महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष निर्मला चाहर ने संयुक्त बयान में कहा कि यह तथ्य न केवल गलत है, बल्कि सम्पूर्ण जाट समाज का अपमान है।
कप्तान सिंह चाहर ने बताया कि एनसीईआरटी ने भरतपुर समेत हरियाणा, पंजाब, जम्मू और उत्तर भारत के कई राज्यों को मराठा शासन के अधीन दिखाया है, जबकि भरतपुर राज्य अपनी स्थापना से लेकर 1948 तक कभी किसी के अधीन नहीं रहा।
ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, 1760-61 की पानीपत की लड़ाई में मराठा सेनापति सदाशिवराव भाऊ ने महाराजा सूरजमल से मदद मांगी थी, पर उनकी सलाह न मानने के कारण सूरजमल ने अपनी सेना वापस बुला ली थी। महाराजा सूरजमल की सेना के वापस लौटने के बाद 1760-61 की पानीपत की लड़ाई सदाशिव राव भाऊ ने अहमद शाह अब्दाली से अकेले ही लड़ी और उसमें वह बुरी तरह पराजित हुए। यहां तक कि वे खुद और उनका भतीजा विश्वास राव भाऊ भी मारे गये।
सदाशिव राव भाऊ के मारे जाने के बाद मराठा सैनिक और महिलाएं महिलाओं को हरियाणा और भरतपुर में पूरा संरक्षण दिया गया। महाराजा सूरजमल और महारानी किशोरी ने भूखे घायल लुटे-पिटे मराठाओं और उनकी महिलाओं को भोजन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई। ठीक होने पर उन्हें कपड़े और मुद्रा देकर विदा किया। साथ में हिफाजत के लिए अपने सैनिकों को भी भेजा।
जाट महासभा ने एनसीईआरटी की केन्द्रीय कमेटी, निदेशक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से अपील की है कि गलत इतिहास से अगली पीढ़ी को गुमराह न किया जाए और तुरंत पाठ्यक्रम में सुधार कर सही तथ्य शामिल किए जाएं। साथ ही चेतावनी दी कि यदि भरतपुर और जाटों के इतिहास से छेड़छाड़ जारी रही, तो आंदोलन करने को बाध्य होंगे।