भरतपुर को मराठाओं के अधीन दिखाने पर जाट महासभा का आक्रोश, कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन, ज्ञापन

आगरा। एनसीईआरटी की कक्षा-8 की पुस्तक Our Pasts – III (2025 सिलेबस) में 1759 के मानचित्र में भरतपुर राज्य को मराठाओं के अधीन दिखाए जाने पर अखिल भारतीय जाट महासभा ने तीव्र विरोध जताया है। महासभा का कहना है कि भरतपुर कभी भी किसी के अधीन नहीं रहा, बल्कि यह हमेशा से अजेय और स्वतंत्र रियासत रही है। इसी मुद्दे को लेकर आज कलेक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन किया गया और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।

Aug 20, 2025 - 20:57
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भरतपुर को मराठाओं के अधीन दिखाने पर जाट महासभा का आक्रोश, कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन, ज्ञापन
बुधवार को आगरा कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते जाट महासभा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता।

महाराजा सूरजमल के जयघोष के साथ प्रदर्शन

जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर के नेतृत्व में सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता सुबह 11 बजे झंडे-बैनर के साथ एकत्रित हुए। इस दौरान महाराजा सूरजमल अमर रहें, महाराजा जवाहर सिंह अमर रहें, वीर गोकुला अमर रहें, राजा राम अमर रहें, राजा महेंद्र प्रताप अमर रहें और चौधरी चरण सिंह अमर रहें जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा। जलूस के रूप में जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में प्रस्तुत किए ऐतिहासिक प्रमाण

जाट महासभा ने अपने ज्ञापन में कई प्रामाणिक ऐतिहासिक ग्रंथों और यात्रियों के विवरणों का हवाला देते हुए भरतपुर को स्वतंत्र जाट राज्य बताया। ज्ञापन में इतिहासकार यदुनाथ सरकार की पुस्तक मुगल साम्राज्य का पतन, भाग-द्वितीय (पृष्ठ 219), हरीराम गुप्ता की पुस्तक मराठा और पानीपत का युद्ध (पृष्ठ 153-154), रघुवीर सिंह की पुस्तक पानीपत का युद्ध (पृष्ठ 212-213), एलेक्ज़ेंडर कनिंघम की भारत पुरातात्त्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट, भाग-द्वितीय (पृष्ठ 185-186) और फ्रांसीसी यात्री जीन लॉ और ब्रिटिश अधिकारी जॉर्ज थॉमस (1810) तथा विलियम फ्रैंकलिन (1805) का हवाला देते हुआ कहा गया कि इन सभी ने भरतपुर को स्वतंत्र जाट राज्य बताया है।

जाट महासभा की मांगें

एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तक के 1759 के मानचित्र से भरतपुर को मराठाओं के अधीन दर्शाने वाली सीमा रेखा हटाई जाए। भरतपुर को स्वतंत्र जाट राज्य के रूप में सही ऐतिहासिक संदर्भ के साथ प्रस्तुत किया जाए। भविष्य में ऐसी त्रुटियों से बचने हेतु एक ऐतिहासिक शिक्षा समिति गठित की जाए।

नेताओं ने जताई आपत्ति

जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर और महानगर अध्यक्ष गजेंद्र सिंह नरवार ने कहा कि इतिहास केवल शैक्षणिक विषय नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और स्वाभिमान का आधार है। वरिष्ठ नेता चौ. रामेश्वर सिंह और मोहन सिंह चाहर ने कहा कि महाराजा सूरजमल के योगदान को तोड़-मरोड़कर पेश करना छात्रों को गुमराह करने जैसा है।
युवा जाट महासभा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी और महानगर अध्यक्ष लखन चौधरी ने चेतावनी दी कि यदि गलती नहीं सुधारी गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष निर्मल चाहर, महानगर अध्यक्ष वंदना सिंह और प्रदेश मंत्री निशा चौधरी ने कहा कि जाट समाज के गौरव से समझौता किसी कीमत पर स्वीकार नहीं होगा।

प्रदर्शन में ये भी रहे शामिल

प्रदर्शन में राधेश्याम मुखिया, भूपेंद्र सिंह राणा, चौ. नवल सिंह, नेपाल सिंह राणा, चौ. गुलवीर सिंह, चौ. दिलीप सिंह, अजीत चाहर प्रधान, चौ. बाबूलाल प्रधान, सुनील चौधरी, लोकेंद्र सिंह चौधरी, कैप्टन सत्यवीर सिंह, कैप्टन तेजवीर सिंह ठाकुरेला, सूबेदार महावीर सिंह सोलंकी, जगदीप चाहर, बलबीर सिंह मुखिया, डॉ. जगपाल सिंह, रजत चाहर, अनुपमा सिंह, भारत सिंह कुंतल, अचल सिंह, रामेश्वर नौहवार, वतेजेंद्र नौहवार, समर सिंह मलिक, श्याम फौजदार, वरुण कुमार, अमन नौहवार, रामलखन सिंह समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री वीरेंद्र सिंह छौंकर ने किया।

SP_Singh AURGURU Editor