जेईई एडवांस 2026,गणित ने बढ़ाई मुश्किलें, केमिस्ट्री बनी छात्रों की सबसे बड़ी राहत

इस बार जेईई एडवांस 2026 का पेपर मध्यम से कठिन रहा। गणित सबसे कठिन और लंबा विषय माना गया। भौतिक विज्ञान में अवधारणात्मक और तार्किक प्रश्न अधिक रहे। रसायन विज्ञान अपेक्षाकृत आसान और अंक दिलाने वाला रहा। परीक्षा में गति से ज्यादा सटीकता महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बार 2025 की तुलना में अवधारणात्मक गहराई और गणना का दबाव बढ़ा। कठिन गणित के कारण कटऑफ ज्यादा बढ़ने की संभावना कम मानी जा रही है।

May 17, 2026 - 20:16
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जेईई एडवांस 2026,गणित ने बढ़ाई मुश्किलें, केमिस्ट्री बनी छात्रों की सबसे बड़ी राहत
मोशन अकैडमी आगरा के डायरेक्टर डॉ. अरुण शर्मा।

आगरा। देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा मानी जाने वाली जेईई एडवांस 2026 इस बार छात्रों के लिए मध्यम से कठिन स्तर की रही है। इस बार परीक्षा में केवल रटकर पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए सफलता आसान नहीं रहेगी, बल्कि गहरी वैचारिक समझ, तार्किक सोच और बेहतर समय प्रबंधन करने वाले छात्रों को ही सफलता मिल सकती है। 

मोशन अकैडमी आगरा के डायरेक्टर डॉ. अरुण शर्मा ने परीक्षा का विश्लेषण करते हुए बताया कि इस बार पेपर पेचीदा जरूर था, लेकिन अनुचित नहीं कहा जा सकता है। जिन छात्रों ने विषयों की मूल अवधारणाओं को गहराई से समझा और परीक्षा के दौरान सटीकता बनाए रखी होगी, उन्हें फायदा मिलने की संभावना अधिक है।

उन्होंने बताया कि गणित इस बार सबसे ज्यादा कठिन और लंबा विषय रहा। कई प्रश्न एक से अधिक अवधारणाओं पर आधारित थे और उनमें गणनाएं भी काफी अधिक थीं। इसी वजह से विद्यार्थियों का काफी समय गणित में खर्च हुआ और यही विषय रैंक तय करने में सबसे बड़ा कारण बन सकता है।

भौतिक विज्ञान का स्तर मध्यम से कठिन रहा। इसमें अवधारणात्मक और तार्किक क्षमता वाले प्रश्नों की संख्या अधिक देखने को मिली। कई सवाल सीधे सूत्र आधारित न होकर समझ और प्रयोग पर आधारित थे, जिसके कारण छात्रों को सोचने में ज्यादा समय लगा। वहीं रसायन विज्ञान अपेक्षाकृत आसान और अंक दिलाने वाला विषय रहा। इसमें एनसीईआरटी आधारित संतुलित प्रश्न अधिक पूछे गए। जिन छात्रों की रसायन विज्ञान अच्छी रही, उन्हें कुल अंक संभालने में मदद मिलेगी।

डॉ. अरुण शर्मा के अनुसार इस बार गति से ज्यादा सटीकता महत्वपूर्ण रही। जिन विद्यार्थियों ने जल्दबाजी में प्रश्न हल किए, उनसे गलतियां होने की संभावना ज्यादा रही। उन्होंने 2025 और 2026 के पेपर की तुलना करते हुए कहा कि दोनों वर्षों में प्रश्नपत्र का प्रारूप लगभग समान रहा, लेकिन 2026 के पेपर में अवधारणात्मक गहराई और गणना का दबाव थोड़ा अधिक देखने को मिला।

कटऑफ को लेकर उनका मानना है कि पेपर का स्तर आसान न होने के कारण न्यूनतम चयन अंक में बहुत अधिक बढ़ोतरी की संभावना कम है। विशेष रूप से गणित के कठिन होने से औसत अंक नीचे जा सकते हैं, जिसका असर कुल कटऑफ पर दिखाई दे सकता है।