सरकार ने चांदी के आयात को और किया सख्त, नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू
सरकार ने चांदी पर अपनी बंदिशें बढ़ा दी हैं। इसे लेकर एक आदेश जारी हुआ है। इसके तहत चांदी की सिल्लियों के आयात की स्थिति को 'मुक्त' से बदलकर 'प्रतिबंधित' कर दिया गया है। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू है। इसका मकसद कीमती धातुओं के आयातों पर निगरानी को कड़ा करना है।
नई दिल्ली। सरकार ने चांदी के आयात पर बंदिशें बढ़ा दी हैं। शनिवार को एक सरकारी आदेश जारी हुआ। इसके अनुसार, अधिकारी सोने-चांदी के प्रवाह को कंट्रोल करने और देश के बाहरी क्षेत्र पर दबाव कम करने के अपने प्रयासों को जारी रखे हुए हैं। यह ताजा कदम सरकार की ओर से हाल के दिनों में घोषित उपायों की एक सीरीज के बीच आया है। इनका मकसद कीमती धातुओं के आयात पर निगरानी और कंट्रोल को और सख्त करना है।
भारत सरकार ने चांदी की सिल्लियों के आयात से जुड़ी नीति को सख्त कर दिया है। तत्काल प्रभाव से उनकी स्थिति को 'मुक्त' से बदलकर 'प्रतिबंधित' कर दिया है।
सरकार ने शुक्रवार को 'एडवांस ऑथराइजेशन' (AA) स्कीम के तहत सोने के आयात की सीमा 100 किलो तय कर दी। साथ ही, विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की एक अधिसूचना के जरिये रत्न और आभूषण क्षेत्र के आयातकों के लिए सख्त अनुपालन आवश्यकताओं को भी लागू किया।
अधिसूचना में कहा गया है, 'सोने के आयात के लिए 'एडवांस ऑथराइजेशन' केवल 100 किलो की अधिकतम अनुमेय मात्रा सीमा के अधीन ही जारी किया जाएगा।'
इसमें कहा गया है, 'अगर कोई व्यक्ति पहली बार 'एडवांस ऑथराइजेशन' के लिए आवेदन करता है तो संबंधित क्षेत्रीय प्राधिकरण की ओर से आवेदक की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का अनिवार्य रूप से फिजिकल इंस्पेक्शन किया जाएगा। इसका मकसद मैन्युफैक्चरिंग इकाई के अस्तित्व, क्षमता और परिचालन स्थिति को सत्यापित करना होगा।'
सरकार ने भविष्य में सोने के आयात की मंजूरी को निर्यात प्रदर्शन की जरूरतों से भी जोड़ दिया है।
अधिसूचना में कहा गया है, 'सोने के आयात के लिए कोई भी बाद का 'एडवांस ऑथराइजेशन' तभी जारी करने पर विचार किया जाएगा, जब सोने के लिए पिछले 'एडवांस ऑथराइजेशन' के तहत तय निर्यात दायित्व का कम से कम 50% पूरा कर लिया गया हो।'
निगरानी को और मजबूत करने के लिए 'एडवांस ऑथराइजेशन' स्कीम के तहत आयातकों को अब हर पखवाड़े (दो सप्ताह में एक बार) परफॉर्मेंस रिपोर्ट जमा करनी होगी। इस रिपोर्ट को एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की ओर से प्रमाणित किया जाना अनिवार्य होगा। इसमें आयात और निर्यात गतिविधियों का विस्तृत विवरण शामिल होगा।
केंद्र सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। इसके अलावा, सोने-चांदी के आयात पर 3 फीसदी 'इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स' (IGST) भी लगाया गया था।
इन उपायों का उद्देश्य गैर-आवश्यक आयातों पर अंकुश लगाना और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है। यह ऐसे समय में किया गया है, जब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं देश के बाहरी आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर रही हैं।
साल 2025-26 में भारत का सोने का आयात 24 फीसदी से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, इस दौरान सोने की खेप की मात्रा (वॉल्यूम) में 4.76 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यह घटकर 721.03 टन रह गई। सरकार ने पहले कहा था कि इस सख्त ढांचे का उद्देश्य आयात की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना है। साथ ही रत्न और आभूषण जैसे निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों के लिए पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना भी है।