ईद की खुशियों संग गम की भी परछाईं: शहर में धूमधाम से मनाई जा रही ईद-उल-फितर, शिया समुदाय ने गम में नहीं मनाया त्योहार
आगरा। शहर भर में ईद-उल-फितर आज उल्लास और भाईचारे के साथ मनाई जा रही है। जहां एक ओर मस्जिदों में हजारों लोगों ने नमाज अदा कर एक-दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी, वहीं शिया समुदाय ने ईरान में हुए हमलों में शहीद हुए शिया समुदाय के सर्वोच्च धर्मगुरु आयतुल्ला अली खामनेई के शोक में इस बार ईद न मनाने का निर्णय लिया, जिससे खुशियों के बीच गम की लहर भी देखने को मिली।
शहर में ईद-उल-फितर के मौके पर सुबह से ही उत्साह का माहौल रहा। शहर की प्रमुख जामा मस्जिद सहित ईदगाह, ताजमहल, शाहगंज, लोहामंडी, सुल्तानपुर, अर्जुन नगर, मंटोला, नई की मंडी, खवासपुरा सहित अन्य क्षेत्रों की मस्जिदों में मुस्लिम समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर ईद की नमाज अदा की। नमाज के बाद लोगों ने गले मिलकर एक-दूसरे को ईद की बधाई दी और भाईचारे का संदेश दिया।
इससे पहले विगत अलविदा की नमाज बाद बाजारों में भारी भीड़ उमड़ी थी। लोगों ने कपड़े, सेवइयां, मिठाइयां और अन्य जरूरी सामान की जमकर खरीदारी की गई, जिससे बाजारों में रौनक बनी रही।
ईद के मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की मस्जिदों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस अधिकारी लगातार भ्रमण करते रहे और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई, जिससे त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सका।
हालांकि इस बार ईद के जश्न के बीच शिया समुदाय में शोक का माहौल भी देखने को मिला। समुदाय के लोगों ने ईरान में हुए हमले में सर्वोच्च शिया धर्मगुरु आयतुल्लाह अली खामनेई सहित अन्य लोगों की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए ईद-उल-फितर न मनाने का फैसला लिया। उनका कहना है कि इस त्रासदी में शहीद हुए लोगों के सम्मान में यह निर्णय लिया गया है।
ईद की नमाज के बाद शहर में लोग एक-दूसरे के घर पहुंचकर ईद की मुबारकबाद देते नजर आए, वहीं कई स्थानों पर सामाजिक संगठनों द्वारा भी आपसी सौहार्द को बढ़ावा देने के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।