जस्टिस नागरत्ना होंगी देश की पहली महिला सीजेआई
नई दिल्ली। जस्टिस बी वी नागरत्ना सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम में शामिल होने वाली पहली महिला जज बन गई हैं। 23 मई को जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका के रिटायरमेंट के चलते 25 मई को जस्टिस नागरत्ना सुप्रीम कोर्ट की 5वीं सबसे सीनियर जज बन गईं। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम में 5 सबसे सीनियर जज ही रहते हैं, जिसमें सीजेआई भी शामिल होते हैं।
भारत में सीजेआई की नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर होती है। ऐसे में बी वी नागरत्ना 11 सितंबर 2027 को भारत की 50वीं मुख्य न्यायाधीश बनेंगी। वो इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला होंगी। उनका कार्यकाल लगभग एक महीने का होगा। अपने कार्यकाल में जस्टिस नागरत्ना ने कई अहम फैसले सुनाए। इसमें बिलकिस बानो केस के दोषियों की रिहाई रद्द करना और नोटबंदी पर असहमति जताने के फैसले भी शामिल हैं।
2004 में जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने बिलकिस बानो केस में गुजरात सरकार द्वारा 11 दोषियों को दी गई रिहाई को अवैध घोषित कर दिया। बेंच ने कहा कि दोषियों को महाराष्ट्र की विशेष अदालत ने सजा सुनाई थी। इसलिए रिहाई का अधिकार महाराष्ट्र सरकार को था, न कि गुजरात को।
2023 में 5 जजों की संविधान पीठ में जस्टिस नागरत्ना ने सहमति जताई कि सरकार अपने मंत्रियों के बयानों के लिए जिम्मेदार नहीं है।
2023 में 5 जजों की बेंच में से 4 ने 2016 में हुई नोटबंदी को वैध ठहराया, जबकि जस्टिस नागरत्ना ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि फैसला संसद के माध्यम से होना चाहिए था, न कि केवल कार्यकारी आदेश के माध्यम से।
अवैध विवाह से जन्मे बच्चों को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकारी माना। उन्होंने कहा कि माता-पिता अवैध हो सकते हैं, लेकिन कोई बच्चा अवैध नहीं होता।
कोरोना महामारी के दौरान कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया कि मिड डे मील योजना को जारी रखा जाए और डिजिटल एजुकेशन जारी रखी जाए।