न्याय की जीत, 41 साल पुराने मुकदमे में निर्दोष कैदी को हाईकोर्ट से मिली आज़ादी

आगरा। कहते हैं न्याय देर से मिले तो भी आशा जीवित रहती है। इसका जीवंत उदाहरण तब देखने को मिला जब पैरवी के अभाव में पिछले दो माह से जिला जेल में बंद एक निर्दोष व्यक्ति को सत्यमेव जयते ट्रस्ट की मानवीय पहल से हाईकोर्ट से न्याय मिला और उसे रिहा कराया गया।

Dec 26, 2025 - 19:48
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न्याय की जीत, 41 साल पुराने मुकदमे में निर्दोष कैदी को हाईकोर्ट से मिली आज़ादी
न्याय दिलाने के बाद जेल से बाहर आए व्यक्ति के साथ सत्यमेव जयते ट्रस्ट के सदस्य।

परिवार न होने और गंभीर बीमारी से जूझ रहे कैदी को सत्यमेव जयते ट्रस्ट ने दिलाया न्याय

आगरा। कहते हैं न्याय देर से मिले तो भी आशा जीवित रहती है। इसका जीवंत उदाहरण तब देखने को मिला जब पैरवी के अभाव में पिछले दो माह से जिला जेल में बंद एक निर्दोष व्यक्ति को सत्यमेव जयते ट्रस्ट की मानवीय पहल से हाईकोर्ट से न्याय मिला और उसे रिहा कराया गया।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को त्रुटिपूर्ण मानते हुए 1984 के डकैती प्रकरण और 1987 में दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया तथा लाखन सिंह को पूर्णतः निर्दोष घोषित करते हुए बरी कर दिया।

41 साल पुराना मामला, जीवन भर का संघर्ष

लाखन सिंह को वर्ष 1984 में एक लूट की घटना में आरोपी बनाया गया था। 1987 में अदालत द्वारा दोषसिद्ध किए जाने के बाद उसे जेल जाना पड़ा। बाद में उसने उच्च न्यायालय से जमानत प्राप्त कर ली, लेकिन परिवार में कोई सदस्य न होने और आर्थिक असहायता के कारण उसकी आगे की कानूनी पैरवी नहीं हो सकी। इसी कारण हाईकोर्ट के एक पुराने आदेश के अनुपालन में दो माह पूर्व उसे पुनः जेल भेज दिया गया, जबकि वह स्वयं को निर्दोष बताता रहा।

सत्यमेव जयते ट्रस्ट की मानवीय पहल

मामला संज्ञान में आने पर सत्यमेव जयते ट्रस्ट ने इसे केवल कानूनी नहीं, बल्कि मानवता का विषय मानते हुए लाखन सिंह को न्याय दिलाने का बीड़ा उठाया। ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं युवा अधिवक्ता रोहित अग्रवाल, दुर्गेश शर्मा तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता आलोक सिंह ने निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक पूर्ण निष्ठा, तथ्यात्मक तर्कों और निस्वार्थ भाव से इस मामले की पैरवी की।

गंभीर बीमारी ने बढ़ाई संवेदनशीलता

ट्रस्ट द्वारा सहायता का एक मुख्य कारण यह भी रहा कि लाखन सिंह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है। चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार वह जीवन के अंतिम चरण में है।
परिवार और सहारे के अभाव में यदि उसे न्याय न मिलता, तो यह व्यवस्था पर एक गहरा प्रश्नचिह्न होता।

जेल प्रशासन का मानवीय सहयोग

इस पूरे मामले में जेलर नागेश सिंह एवं जिला कारागार प्रशासन ने भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए हर संभव सहयोग प्रदान किया। ट्रस्ट के महामंत्री गौतम सेठ की उपस्थिति एवं जेल प्रशासन की देखरेख में 20 दिसंबर को लाखन सिंह की जिला कारागार से रिहाई सुनिश्चित की गई।

अधिवक्ताओं के प्रति आभार

सत्यमेव जयते ट्रस्ट के अध्यक्ष मुकेश जैन, अशोक गोयल, अनिल कुमार (एडवोकेट) एवं नंदकिशोर गोयल ने स्थानीय स्तर से लेकर हाईकोर्ट तक निस्वार्थ सेवा देने वाले तीनों अधिवक्ताओं के प्रति आभार एवं सम्मान व्यक्त किया। यह प्रकरण न केवल न्याय व्यवस्था में मानवीय हस्तक्षेप की शक्ति को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि यदि कोई साथ खड़ा हो जाए, तो न्याय आज भी संभव है।