शिव महापुराण कथा के लिए सात शिवालयों की दिव्य पालकियों संग निकली कलश यात्रा, 251 महिलाओं ने दक्षिण भारतीय वेशभूषा में बढ़ाया आस्था का वैभव

आगरा। अधिक मास के पुण्यकाल में सोमवार को आगरा पूरी तरह शिवमय हो उठा। पहली बार शहर के सात प्रमुख शिवालयों की दिव्य पालकियां एक साथ भव्य कलश यात्रा में शामिल हुईं तो पूरा वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर इस विराट आयोजन ने शहरवासियों को अद्भुत धार्मिक अनुभूति कराई।

May 17, 2026 - 19:19
May 17, 2026 - 21:25
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शिव महापुराण कथा के लिए सात शिवालयों की दिव्य पालकियों संग निकली कलश यात्रा, 251 महिलाओं ने दक्षिण भारतीय वेशभूषा में बढ़ाया आस्था का वैभव
महाराजा अग्रसेन भवन, लोहामंडी में शिव परिवार संस्था द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के शुभारंभ पर सात शिवालयों की दिव्य पालकियों और 251 कलशों के साथ निकली भव्य कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालु।

शिव परिवार संस्था द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के शुभारंभ पर निकली इस भव्य कलश यात्रा में 251 महिलाओं ने दक्षिण भारतीय पारंपरिक वेशभूषा धारण कर सिर पर स्वर्ण कलश रखे और शिव भक्ति की अनुपम छटा बिखेरी। मार्गभर पुष्पवर्षा, नासिक बैंड, भव्य झांकियों और शिवभक्तों के उत्साह ने पूरे शहर को आध्यात्मिक उत्सव में बदल दिया।

चिंताहरण मंदिर से शुरू हुई कलश यात्रा

भव्य कलश यात्रा का शुभारंभ प्रातः जयपुर हाउस स्थित चिंताहरण मंदिर से हुआ। यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई महाराजा अग्रसेन भवन, लोहा मंडी स्थित कथा स्थल तक पहुंची। रास्तेभर श्रद्धालु भगवान शिव के जयकारे लगाते रहे। जगह-जगह भक्तों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। महिलाओं की सुसज्जित कतारें और भक्ति गीतों की गूंज श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।

सप्त शिवालयों की पालकियों ने मोहा मन

यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण आगरा के सात प्रमुख शिवालयों की दिव्य पालकी झांकियां रहीं। इनमें श्रीमनःकामेश्वर नाथ महादेव, राजेश्वर नाथ महादेव, रावली महादेव, पृथ्वीनाथ महादेव, कैलाश महादेव, वानखंडी महादेव और बल्केश्वर नाथ महादेव की भव्य पालकियां शामिल रहीं। इसके साथ ही द्वादश ज्योतिर्लिंगों की विशेष झांकी भी श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र बनी रही।

23 मई तक चलेगी शिव महापुराण कथा

मुख्य यजमान छोटेलाल बंसल एवं कांता बंसल ने बताया कि महाराजा अग्रसेन भवन, लोहा मंडी में 23 मई तक प्रतिदिन सायं 5 बजे से श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जाएगा। याज्ञिकरत्न पंडित विष्णुकांत शास्त्री आचार्यत्व निभा रहे हैं, जबकि कथा व्यास मृदुल कांत शास्त्री श्रद्धालुओं को शिव महिमा का रसपान करा रहे हैं।

201 रुद्राभिषेक बने आकर्षण

कथा स्थल पर सोमवार सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक 201 रुद्राभिषेक संपन्न होंगे। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को कथा स्थल पर सप्त शिवालयों के दर्शन कराने की विशेष व्यवस्था भी की गई है। 21 मई को सुबह 10 बजे गोपाल सहस्त्रनाम पाठ एवं तुलसी अर्चन होगा। 23 मई को कथा विश्राम उपरांत हवन, ब्रह्मभोज और प्रसादी वितरण के साथ आयोजन का समापन किया जाएगा।

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अधिकमास के प्रथम दिन श्री प्रेमनिधि मंदिर में सजा अन्नकूट मनोरथ

आगरा। अधिकमास के शुभारंभ के साथ रविवार को नाई की मंडी स्थित श्री प्रेमनिधि मंदिर पूर्णतः भक्तिमय वातावरण में डूब गया। ठाकुर श्री श्याम बिहारी (श्री बड़े गोविंद) जी महाराज के श्री पुरुषोत्तम मास महोत्सव का भव्य शुभारंभ अन्नकूट मनोरथ के साथ श्रद्धा, आस्था और उल्लासपूर्वक किया गया।

17 मई से 15 जून तक चलने वाले माहव्यापी धार्मिक महोत्सव के प्रथम दिन मंदिर में ठाकुर जी को 56 भोग सहित विविध प्रकार के मिष्ठान, नमकीन और पारंपरिक व्यंजन अर्पित किए गए। रंग-बिरंगी सजावट, भव्य श्रृंगार और भक्तों की उमड़ी भीड़ ने पूरे मंदिर परिसर को दिव्य आध्यात्मिक उत्सव में बदल दिया।

मुख्य सेवाधारी हरिमोहन गोस्वामी ने बताया कि अन्नकूट मनोरथ के साथ इस दिव्य महोत्सव का शुभारंभ हुआ है और आगामी दिनों में भी विभिन्न मनोरथों के माध्यम से श्रद्धालुओं को ठाकुर जी की विशेष सेवाओं और उत्सवों के दर्शन प्राप्त होंगे।

श्री ठाकुर मथुराधीश जी महाराज मंदिर में पाटोत्सव संग प्रारम्भ हुए पुरुषोत्तम मास के उत्सव

आगरा। यमुना किनारा स्थित प्राचीन पुष्टिमार्गीय श्रीठाकुर मथुराधीश जी महाराज मंदिर में पाटोत्सव के साथ पुरुषोत्तम मास के उत्सवों का शुभारम्भ हो गया है। मंदिर परिसर सतरंगी पुष्पों से सुसज्जित रहा और श्रीहरि के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। अलौकिक श्रृंगार में विराजमान ठाकुर जी के दर्शन को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सोमवार को बागचा उत्सव का भक्ति भाव के साथ आयोजन किया जाएगा।

यमुना सेवक बृज खंडेलवाल ने बताया कि महाप्रभु वल्लभाचार्य पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के अधिष्ठाता, शुद्धाद्वैत वेदांत के प्रवर्तक तथा भक्ति मार्ग के महान आचार्य थे। उन्होंने बाल्यकाल में ही वेद-वेदांत, पुराण एवं श्रीमद्भगवद्गीता पर गहन अधिकार प्राप्त कर लिया था। उन्होंने श्रीमद्भागवत पर ‘सुभोधिनी’ टीका तथा ‘अनुभाष्य’ सहित अनेक ग्रंथों के माध्यम से शुद्धाद्वैत सिद्धांत की स्थापना की, जिसमें ब्रह्म को सगुण, साकार और पूर्ण माना गया है तथा जीव को उसका अंश बताया गया है।

उन्होंने पुष्टिमार्ग की स्थापना करते हुए श्रीकृष्ण भक्ति एवं सेवा को प्रमुख स्थान दिया तथा भक्ति की उन्नति को भगवान की कृपा पर आधारित बताया। उनके द्वारा ‘अष्टछाप’ कवियों को प्रेरणा दी गई तथा गोस्वामी परंपरा का विस्तार हुआ।

इस अवसर पर महंत नंदन श्रोत्रिय, डॉ. हरेंद्र गुप्ता, जगन प्रसाद तेरीया, रोहित गुप्ता, सुरेंद्र सिंह, अपला शर्मा, सूर्या श्रोत्रिय, चतुर्भुज तिवारी, राहुल राज, दीपक राजपूत, निधि पाठक, पद्मिनी ताजमहल, मीरा खंडेलवाल, बल्लभ, अभिनव श्रोत्रिय, जुगल किशोर श्रोत्रिय सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor