कन्नौज में निर्माणाधीन रेलवे स्टेशन के लेंटर ढहने से 23 श्रमिक घायल, पांच गंभीर
कन्नौज। कन्नौज में अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत रेलवे स्टेशन के निर्माणाधीन लेंटर के ढहने से कई मजदूर मलबे में दब गए हैं। बचाव कार्य के जरिए मजदूरों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल में इलाज के लिए भेजा जा रहा है। कुछ की मौत की भी आशंका है।
घटना की सूचने मिलते ही मौके पर पहुंचे कानपुर कमिश्नर विजयेंद्र पांडियन कानपुर जोन के आईजी जोगेंद्र कुमार, हादसा स्थल का जायजा लिया है। कमिश्नर ने बताया कि अभी तक 23 मजदूर रेस्क्यू ऑपरेशन में घायल अवस्था में अलग-अलग अस्पताल भेजे गए है। मलबे को हटाने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन में अभी समय लग सकता है। एलडीआरएफ की टीम आ रही है। 5 घायलों को प्राथमिक उपचार देकर छोड़ दिया गया है। 5 घायलों की हालत नाजुक है। ऐसे में कुछ मजदूरों की मौत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
कन्नौज रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे को लेकर बीजेपी नेता और राज्य मंत्री असीम अरुण ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि कन्नौज के रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माणाधीन लेंटर पर मजदूर काम कर रहे थे। मात्रा से अधिक कंक्रीट डालने पर लिंटर ढह गया। हादसे में कुल 23 लोग घायल हैं। जिसका इलाज कन्नौज के जिला अस्पताल में चल रहा है। मलबे में और लोगों के दबे होने की संभावना है। मलबे को हटाने के लिए मशीनों के साथ साथ मानव श्रम का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। रेलवे से जुड़े होने के कारण इस हादसे की जांच कराई जाएगी। इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे निश्चित तौर पर दंड दिया जाएगा। हादसे में जो भी घायल हुए उन सभी का इलाज सरकार की ओर से निशुल्क कराया जा रहा है। प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी मामले में अधिकारियों को निर्देश देते हुए बचाव कार्य में तेजी लाने और घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने को कहा है।
इस घटना पर समाजवादी पार्टी के अलावा कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है कि, "कन्नौज में निर्माणाधीन रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग गिरने से कई मजदूरों के निधन की सूचना बेहद दुःखद है। भाजपा राज में बनने वाली इमारतों के टिकने की कोई गारंटी नहीं होती। हर काम में भ्रष्टाचार को भाजपा ने अपनी पहचान बना ली है। यह भ्रष्टाचार और लापरवाही से अनेक बार कई लोगों के जान की दुश्मन साबित हो चुकी है। आखिर ऐसी लापरवाहियां जनता की जान कब तक लेती रहेंगी?