आगरा के कवि अनिल शर्मा के लेखन पर केंद्रित ‘काव्य कसौटी'-का दिल्ली में विमोचन
विश्व हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन हॉल में हिंदी साहित्य का ऐतिहासिक क्षण साक्षी बना, जब आगरा के वरिष्ठ कवि अनिल कुमार शर्मा के काव्य लेखन पर केंद्रित समीक्षात्मक पुस्तक ‘काव्य कसौटी (एक आलोचनात्मक परिदृश्य)’ का विमोचन हुआ। देश–विदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों की आलोचनात्मक दृष्टि से सजी यह कृति हिंदी आलोचना के क्षेत्र में एक सशक्त हस्तक्षेप के रूप में सामने आई।
आगरा। विश्व हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर कांस्टीट्यूशन हॉल, नई दिल्ली में “चित्र कला संगम” द्वारा आयोजित सम्मान समारोह एवं काव्य संध्या में आगरा के वरिष्ठ कवि अनिल कुमार शर्मा के लेखन पर संपादित समीक्षात्मक पुस्तक ‘काव्य कसौटी (एक आलोचनात्मक परिदृश्य)’ का विमोचन विख्यात हास्य–व्यंग्य कवि सुरेन्द्र शर्मा एवं संस्था के पदाधिकारियों द्वारा किया गया।
इस समीक्षात्मक पुस्तक का संपादन नागरी परिषद के महामंत्री डॉ. हरिसिंह पाल ने किया है। पुस्तक में देश और विदेश के 28 प्रतिष्ठित साहित्यकारों द्वारा अनिल कुमार शर्मा के काव्य संग्रह ‘पाने खोने बीच कहीं’ की कविताओं पर प्रस्तुत आलोचनात्मक टिप्पणियों का संकलन किया गया है, जो मिलकर ‘काव्य कसौटी’ का सशक्त रूप निर्मित करता है।
कार्यक्रम के दौरान “चित्र कला संगम” की ओर से कवि सुरेन्द्र शर्मा ने कवि अनिल कुमार शर्मा को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इसके साथ ही आयोजित काव्य संध्या में अनिल कुमार शर्मा ने अपनी चर्चित कविता ‘चिड़िया को लिखा एक पत्र’ का प्रभावी पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर अनिल कुमार शर्मा ने जानकारी दी कि उनके रचनाकर्म पर अब तक तीन समीक्षात्मक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी पुस्तक ‘कहीं कुछ कम है’ पर आधारित समीक्षात्मक कृति ‘अनिल कुमार शर्मा: हिंदी कविता के सशक्त हस्ताक्षर’ का संपादन हितेश कुमार सिंह, संपादक ‘प्रयाग पथ’, द्वारा किया गया है।
वहीं उनकी पुस्तक ‘समय का संविधान’ पर आधारित समीक्षा पुस्तक ‘प्रेम और विरह (अनुभव एवं परम्परा)’ का लेखन विख्यात लेखक सुशील कश्यप ने किया है।
साहित्यिक उपलब्धियों की इस श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण कड़ी जुड़ने जा रही है। वर्ष 2026 के पुस्तक मेले में अनिल कुमार शर्मा की कृति ‘देर सवेर ही सही’ पर आधारित एक नई समीक्षात्मक पुस्तक प्रकाशित होने जा रही है, जिसका संपादन डॉ. हाशिम बेग मिर्जा द्वारा किया गया है।
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. हाशिम बेग मिर्जा के अनुसार, इन समीक्षात्मक पुस्तकों का उपयोग शोध कार्यों में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। किसी एक कवि के लेखन का मूल्यांकन देश–विदेश के लगभग 70 वरिष्ठ एवं ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों द्वारा किया जाना और उसका चार पुस्तकों के रूप में संकलित होना, हिंदी साहित्य जगत में निस्संदेह एक कीर्तिमान है।
उल्लेखनीय है कि अनिल कुमार शर्मा को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति द्वारा ‘साहित्य श्री’ सम्मान से अलंकृत किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त वे अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित होते रहे हैं।
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