किरावली नहर टूटी, किसानों की मेहनत डूबी: 50 बीघा से अधिक फसल जलमग्न, आंदोलन की चेतावनी
किरावली (आगरा)। शनिवार को किरावली क्षेत्र में वही हुआ जिसकी आशंका किसान लंबे समय से जता रहे थे। अभेदोपुरा माइनर नहर अचानक टूट जाने से दर्जनभर से अधिक किसानों की लगभग 50 बीघा से अधिक भूमि में खड़ी गेहूं, सरसों और लाहा की फसलें पानी में डूबकर पूरी तरह नष्ट हो गईं। अचानक हुए जलप्लावन से खेतों में पानी का सैलाब उमड़ पड़ा और देखते ही देखते किसानों की महीनों की मेहनत जमींदोज हो गई, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी और कोहराम मच गया।
घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ किसान नेता मोहन सिंह चाहर मौके पर पहुंचे और दूरभाष के माध्यम से सिंचाई विभाग के एसडीओ स्पर्श अग्रवाल को नहर टूटने की जानकारी दी। हालांकि, सिंचाई विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही किसानों ने अपने निजी प्रयासों से मिट्टी डालकर नहर को किसी तरह बंद किया, लेकिन तब तक भारी नुकसान हो चुका था।
किसान नेता मोहन सिंह चाहर ने आरोप लगाया कि नहरों की सफाई में विभाग द्वारा किए गए लाखों रुपये के घोटाले के खिलाफ वे लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं। किसानों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि नहरों की समय पर और सही ढंग से मरम्मत नहीं की गई तो इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा। शनिवार की घटना ने उनकी आशंकाओं को सच साबित कर दिया।
ग्राम अभेदोपुरा निवासी चौधरी दीवान सिंह ने बताया कि कुलावा नंबर 14, जंगल पटरी के पास माइनर नहर टूट गई। जलप्लावन से सौदान सिंह (5 बीघा), हरि सिंह (5 बीघा), बंटू (5 बीघा), मुन्ना (5 बीघा), सुरेंद्र सिंह (2 बीघा), केहरी महेंद्र (7 बीघा), ममता, दीवान सिंह (5 बीघा) सहित कई किसानों की गेहूं व लाहा की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।
किसानों का कहना है कि नहर टूटने से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। अब रबी फसल का समय निकल चुका है और खेतों से पानी निकलने के बाद दोबारा बुवाई संभव नहीं है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ेगा।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सिंचाई विभाग के भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। इस दौरान पूर्व प्रधान सुखवीर सिंह सहित कई ग्रामीण और किसान मौजूद रहे।