कृष्ण कला जरदोज़ी: आगरा की पहचान, गौरव और भविष्य का स्वर्णिम धागा

आगरा। ताज के शहर में रविवार को स्वर्णिम धागों से बुनी विरासत जरदोज़ी को नया मंच मिला। आगरा जरदोज़ी डेवलपमेंट एसोसिएशन द्वारा ‘जरदोज़ी हमारी धरोहर, हमारी पहचान’ शीर्षक से होटल फेयरफील्ड बाय मैरियट, संजय प्लेस में आयोजित दो सत्रीय भव्य कार्यक्रम में प्रदर्शनी, कॉन्क्लेव और कौशल विकास कार्यशाला के माध्यम से इस वैदिककालीन कढ़ाई कला को पुनः जाग्रत करने का प्रयास किया गया।

Jul 13, 2025 - 20:14
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कृष्ण कला जरदोज़ी: आगरा की पहचान, गौरव और भविष्य का स्वर्णिम धागा
होटल फेयरफील्ड बाय मैरियट में हुए कॉन्क्लेव को संबोधित करतीं डॉ. रंजना बंसल। मंच पर राकेश गर्ग, पूरन डावर, अनुज कुमार, मनीष अग्रवाल, रजत अस्थाना उपस्थित।


-प्रदर्शनी, कॉन्क्लेव और कौशल विकास कार्यशाला में जरदोज़ी कला को दिलाया नया मंच, जीआई टैग और ओडीओपी में शामिल करने की उठी मांग

जरदोज़ी: आगरा की आत्मा और कृष्ण काल की कला

कार्यक्रम की प्रस्तावना में एसोसिएशन की संरक्षक डॉ. रंजना बंसल ने कहा कि जरदोज़ी महज़ एक कढ़ाई नहीं, बल्कि वैदिक काल से जुड़ी हुई कृष्ण कला है, जो आगरा की सांस्कृतिक आत्मा है। यह वही कारीगरी है जो कभी राजघरानों के वस्त्रों की शोभा थी और आज श्रीकृष्ण के श्रृंगार का हिस्सा है।
उन्होंने कहा, जरदोज़ी शाही कल का गौरव है, भव्य आज की पहचान है और यदि इसे सम्मान मिला, तो यह स्वर्णिम कल की नींव बनेगी।

जरदोज़ी को मिले जीआई टैग और ओडीओपी में स्थान

कॉन्क्लेव में वक्ताओं ने जरदोज़ी को एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल करने और जीआई टैग दिलाने की मांग उठाई। संयुक्त आयुक्त उद्योग अनुज कुमार ने भरोसा दिलाया कि चांदी और ब्रश के बाद अब जरदोज़ी को प्रस्तावित किया जाएगा, और डेढ़-दो वर्षों में जीआई टैग मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि कारीगरों को प्रशिक्षण और बाज़ार से जोड़ने की दिशा में प्रशासन सहयोग करेगा।

कृष्ण कला बनेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान

उप्र लघु उद्योग निगम अध्यक्ष राकेश गर्ग (दर्जा राज्यमंत्री) ने कहा कि जरदोज़ी को अब कृष्ण कला नाम से प्रचारित किया जाएगा। यह कला नवाचार और पर्यटन से जुड़कर वैश्विक पहचान बना सकती है। उन्होंने आगरा के सभी होटलों में जरदोज़ी नमूने रखवाने का सुझाव दिया।

फैशन, निर्यात और उद्यमिता से जुड़े जरदोज़ी के नए स्वरूप

फुटवियर एवं चमड़ा परिषद के अध्यक्ष पूरन डावर ने जरदोज़ी को फैशन और टूरिज्म इंडस्ट्री से जोड़ने की वकालत की। रजत अस्थाना और मनीष अग्रवाल ने स्थानीय बाज़ार और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग पर फोकस करने की बात कही।
रुचिरा माथुर, अग्रज जैन, फैजान, अलर्क लाल ने भी कारीगरों के प्रशिक्षण और नए डिज़ाइन पैटर्न के विस्तार की आवश्यकता बताई।

कौशल विकास कार्यशाला से आत्मनिर्भरता का संकल्प

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में महापौर हेमलता दिवाकर, एडीए उपाध्यक्ष एम. अरून्मोली और पूनम सचदेवा ने दीप प्रज्ज्वलन कर कौशल विकास कार्यशाला का उद्घाटन किया।
इस कार्यशाला में 40 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया और पारंपरिक औज़ारों से जरदोज़ी की बुनाई और डिज़ाइनिंग सीखी। यह प्रशिक्षण न केवल शिल्प सिखाने बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम पहल था।

मेयर हेमलता दिवाकर ने कहा कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर जरदोज़ी को कौशल विकास योजना में शामिल कराने का प्रस्ताव देंगी, ताकि यह कला नई पीढ़ी तक जीवंत रहे।

प्रदर्शनी में दिखी जरदोज़ी की बेमिसाल बुनावट

प्रदर्शनी में राखी कौशिक, अग्रज जैन, कोमिला धर जैसी हस्तियों की स्टॉल्स पर साड़ी, काफ्तान, ऐतिहासिक चित्र, हेडफोन और जरदोज़ी से बना केक लोगों को आकर्षित करता रहा। यह प्रदर्शन इस बात का प्रमाण था कि यह कला सीमाओं से परे जाकर नवाचार को आत्मसात कर रही है।

गणमान्य अतिथि जो मौजूद रहे

इस भव्य आयोजन में प्रमुख रूप से हरविजय वाहिया, डॉ. सुशील गुप्ता, राजेश गोयल, अनिल शर्मा, वत्सला प्रभाकर, सुनीता गुप्ता, केसी जैन, डॉ. डीवी शर्मा, संजय गोयल, रेनू लांबा, आदि गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। संचालन श्रुति सिन्हा ने किया। व्यवस्थाएं मीनाक्षी किशोर, राशि गर्ग, आयुषी चौबे ने संभालीं।

SP_Singh AURGURU Editor