महाशिवरात्रि पर कृष्ण एवेन्यू हुआ शिवमय, प्रेमोत्सव में गूंजी काव्य त्रिवेणी, ‘साक्षीभाव’ बना विचार मंथन का सार
महाशिवरात्रि पर कृष्ण एवेन्यू में प्रेमोत्सव के रूप में भव्य काव्य आयोजन हुआ, जिसमें शिव, प्रेम और वसंत विषय पर कवियों ने स्वरचित रचनाएं प्रस्तुत कीं। मुख्य अतिथि प्रो. लवकुश मिश्र ने ‘साक्षीभाव’ को जीवन का सार बताया, जिसका उल्लेख भगवद्गीता और आदि शंकराचार्य के निर्वाण षट्कम में मिलता है। कार्यक्रम लगभग चार घंटे चला और आध्यात्मिक उल्लास से भरपूर रहा।
आगरा। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर कृष्ण एवेन्यू शिवभक्ति, प्रेम और वसंत के रंगों में पूरी तरह रंग गया। श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर इस विशेष आयोजन को प्रेमोत्सव के रूप में मनाया गया, जहाँ शिव-पार्वती महिमा और राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाओं पर आधारित काव्यधारा लगभग चार घंटे तक निरंतर प्रवाहित होती रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री निशिराज की सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद कवियों और कवयित्रियों ने अपनी स्वरचित रचनाओं के माध्यम से शिव, प्रेम और वसंत की त्रिवेणी का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।
‘साक्षीभाव’ ही जीवन का सार- प्रो. लवकुश मिश्र
मुख्य अतिथि प्रो. लवकुश मिश्र ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के विचार मंथन से जो मूल भाव निकलकर सामने आता है, वह है ‘साक्षीभाव’। उन्होंने कहा कि यही समग्र जीवन का सार तत्व है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यही संदेश Bhagavad Gita में भगवान कृष्ण ने दिया है और यही तत्व आदि शंकराचार्य के ‘निर्वाण षट्कम’ में भी प्रतिपादित होता है।
आचार्य रजनीश के चिंतन में भी ‘साक्षीभाव’
कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ. कुसुम चतुर्वेदी ने योग और दर्शन के संदर्भ में कहा कि ओशो (आचार्य रजनीश) ने भी अपने चिंतन में ‘साक्षीभाव’ के महत्व को प्रमुखता दी है। यह भाव मनुष्य को आत्मबोध और शांति की ओर ले जाता है।
“सृष्टि का निचोड़ है प्रेम”- डॉ. राजेंद्र मिलन
विशिष्ट अतिथि डॉ. राजेंद्र मिलन ने अपने संबोधन में कहा कि समग्र सृष्टि का सार यदि किसी एक शब्द में व्यक्त किया जाए तो वह है ‘प्रेम’। उन्होंने कहा कि यह संदेश हमें भगवान कृष्ण की लीलाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जहाँ प्रेम ही जीवन का आधार बन जाता है।
काव्य पाठ से बंधा समां
कार्यक्रम का संयोजन एवं काव्यमयी संचालन डॉ. शशि गुप्ता ने अत्यंत प्रभावशाली ढंग से किया। इस अवसर पर सुशील सरित, अशोक अश्रु, डॉ. मधु भारद्वाज, डॉ. भावना वरदान, ब्रजबिहारी ‘बिरजू’, निर्मल राकेश, आचार्य उमाशंकर, रामेंद्र शर्मा, प्रकाश गुप्ता ‘बेबाक’, सुधा वर्मा और चंद्रशेखर शर्मा सहित अनेक साहित्यकारों ने अपने काव्य पाठ से वातावरण को आध्यात्मिक ऊँचाइयों तक पहुंचा दिया। शिव-पार्वती की महिमा और राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम पर आधारित रचनाओं ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सफल आयोजन
कार्यक्रम के व्यवस्थापक राजकुमार जैन रहे, जबकि अंत में आर.के. गुप्ता ने सभी अतिथियों और सहभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। महाशिवरात्रि के इस अवसर पर आयोजित प्रेमोत्सव ने भक्ति, प्रेम और दर्शन की ऐसी छटा बिखेरी कि उपस्थित जनमानस लंबे समय तक उसकी आध्यात्मिक अनुभूति में डूबा रहा।