सावन के अंतिम सोमवार पर आगरा में पृथ्वीनाथ महादेव समेत सभी शिवालयों में श्रद्धा का सैलाब
आगरा। सावन का चौथा और अंतिम सोमवार आस्था की अभूतपूर्व अभिव्यक्ति बन गया। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक के शिवालयों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। शिवभक्तों ने पूरे भक्तिभाव से जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर पुण्य अर्जित किया।
पृथ्वीनाथ से बटेश्वर तक गूंजा हर-हर महादेव की गूंज
सावन के इस पवित्र सोमवार को पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर, आगरा का प्रमुख आस्था केंद्र बना रहा। प्राचीन और ऐतिहासिक इस मंदिर में सुबह से भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। जलाभिषेक, रुद्राभिषेक के साथ-साथ श्रद्धालु भजन-कीर्तन और झांकी दर्शन में लीन रहे।
महंत अजय राजौरिया ने बताया कि यह मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि एक पौराणिक ऐतिहासिक धरोहर भी है। मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान शिव ने इस स्थान पर ध्यान लगाया था और स्वयंभू शिवलिंग की स्थापना की थी। यह भी कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला देखने जाते समय शिव यहां कुछ समय रुके थे।
महंत ने बताया कि उनके पूर्वजों द्वारा करवाई गई खुदाई में शिवलिंग का अंत नहीं मिला था, जिससे यह सिद्ध हुआ कि यह स्वयंभू शिवलिंग है। उनका परिवार 13 पीढ़ियों से मंदिर की सेवा कर रहा है और वे स्वयं 14वीं पीढ़ी के महंत हैं।
सम्राट पृथ्वीराज चौहान से जुड़ी मान्यता
मंदिर के इतिहास को और भी गौरवशाली बनाते हुए एक लोकमान्यता यह भी है कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान के काल में भी यह मंदिर धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। उनके समय में भी विशेष पूजा-पाठ और अनुष्ठान होते थे।
अन्य प्रमुख मंदिरों में भी दर्शनार्थियों की भीड़
पृथ्वीनाथ के अलावा राजेश्वर, कैलाश, बल्केश्वर, रावली और मनकामेश्वर महादेव मंदिर सहित अन्य शिवालयों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। हर मंदिर में जलाभिषेक, विशेष पूजा, झांकी और आरती का आयोजन हुआ। पुलिस व मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए। सभी प्रमुख मंदिरों पर पुलिस बल तैनात रहा।
बटेश्वर में कांवड़ियों-भक्तों का उमड़ा सैलाब
तीर्थ धाम बटेश्वर में भी सावन के अंतिम सोमवार पर भक्ति का महापर्व मनाया गया। कासगंज सौरों घाट से गंगाजल लेकर निकले हजारों कांवड़िए रविवार की मध्य रात्रि से ही बटेश्वर पहुंचने लगे थे। ब्रह्मलाल मंदिर में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।
कांवड़िए यमुना नदी में स्नान कर, घाट के किनारे बने प्राचीन शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहे हैं। धार्मिक आयोजनों के साथ ही सुरक्षा व चिकित्सा व्यवस्था भी सक्रिय रही। प्रशासन ने मेला क्षेत्र में विशेष निगरानी रखी।
आस्था और व्यवस्था का अद्भुत तालमेल
सावन के अंतिम सोमवार को आगरा और आस-पास के शिवालयों में आस्था, सुरक्षा और सेवा का संतुलित आयोजन दिखाई दिया। भक्तों ने श्रद्धा से पूजा कर पुण्य लाभ लिया तो प्रशासन ने व्यवस्था संभालकर श्रद्धालुओं को राहत दी।