लेट मैरिज, तनाव और मोटापे से बढ़ रही गर्भाशय की रसौली की समस्या: महिलाएं जीवनशैली सुधारें

आगरा। आज की बदलती जीवनशैली, तनाव, मोटापा और खाने में मिलावट गर्भाशय की रसौली यानी फाइब्रोइड को तेजी से बढ़ा रहे हैं। यह कहना है आईएजीई (इंडियन एसोसिएशन ऑफ गाइनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपिस्ट) के सचिव डॉ. सुजल मुंशी (गुजरात) का। उन्होंने कहा कि गर्भाशय की थैली में गांठ (रसौली) की समस्या अब केवल बड़ी उम्र की महिलाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि 18–20 वर्ष की युवतियों में भी देखने को मिल रही है।

Oct 4, 2025 - 19:01
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लेट मैरिज, तनाव और मोटापे से बढ़ रही गर्भाशय की रसौली की समस्या: महिलाएं जीवनशैली सुधारें
डॊ. सुजल मुंशी।

डॊ. सुजल मुंशी आगरा के ताज होटल ड कनवेन्शन सेन्टर में आयोजित आगरा ऑब्सट्रेटिकल एंड गायनेकोलॉजी सोसायटी के नेशनल व यूपी चैप्टर और डॉ. कमलेश टंडन हॉस्पीटल एंड टेस्ट ट्यूब बेबी सेन्टर द्वारा दो दिवसीय एंडो रोबो गायनी 2025 कार्यशाला में भाग लेने आए हुए हैं।

महिलाओं में बढ़ रहा खतरा

डॊ. सुजल ने बताया कि गर्भाशय में फाइब्रोइड या रसौली की समस्या 20-30 प्रतिशत महिलाओं में देखी जाती है। इनमें से लगभग 3-4 प्रतिशत मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। देरी से विवाह, प्रदूषण और प्रिज़रवेटिव युक्त भोजन, हार्मोनल असंतुलन करने वाली दवाएं तथा तनाव और मोटापा आदि इस समस्या के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

मोटापा और हार्मोनल असंतुलन

डॉ. सुजल मुंशी ने बताया कि मोटापा महिलाओं के लिए सबसे बड़ा जोखिम है। शरीर में फैट टिश्यू अधिक होने से एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे रसौली बनने की संभावना दोगुनी हो जाती है। इसके अलावा, तनाव और अनियमित दिनचर्या भी इस समस्या को और गंभीर बना रही है।

खान-पान और दिनचर्या का रखें ध्यान

उन्होंने कहा कि रसौली से बचाव के लिए महिलाओं को अपनी दिनचर्या को नियमित और तनावमुक्त रखना चाहिए। संतुलित और पौष्टिक भोजन लें, फास्ट फूड और प्रिज़रवेटिव्स से दूरी बनाएं और योग व व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

डॉ. मुंशी ने कहा कि मीनोपॉज के दौरान प्राकृतिक रूप से हार्मोनल असंतुलन के कारण यह समस्या होना सामान्य है, लेकिन अब यह युवाओं में भी दिखाई दे रही है। समय पर जांच और उपचार से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

SP_Singh AURGURU Editor