सड़क हादसों के घायलों को जीवनदायी राहत: एक हफ्ते में इलाज योजना लागू होगी, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को फटकारा

आगरा। सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए राहत की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुआन की पीठ ने आदेश दिया कि सड़क हादसों के घायलों के इलाज के लिए तैयार की जा रही योजना को एक सप्ताह के भीतर देशभर में लागू किया जाए।

Apr 28, 2025 - 22:08
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सड़क हादसों के घायलों को जीवनदायी राहत: एक हफ्ते में इलाज योजना लागू होगी, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को फटकारा

-केंद्र सरकार को चार माह में राहत योजना बनाने के भी निर्देश

-अनिवार्य वाहन बीमा की याचिका रोड सेफ्टी कमेटी को भेजी

इसके साथ ही सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को अंतरिम राहत देने के लिए केंद्र सरकार को चार माह के भीतर एक नई योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

इलाज योजना को लेकर सख्त रूख

आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन द्वारा 2023 में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 162(2) के तहत सरकार के पास इलाज योजना बनाने का अधिकार है, लेकिन तीन वर्ष बीतने के बाद भी योजना लागू नहीं हो पाई। अदालत ने सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव को तलब किया। सचिव ने वर्चुअल उपस्थिति में बताया कि जनरल इंश्योरेंस काउंसिल की आपत्तियों के चलते योजना रुकी हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि अब और देर नहीं होगी, योजना एक सप्ताह के भीतर लागू की जाए। केंद्र सरकार ने भी अदालत के समक्ष इस विलंब के लिए क्षमा मांगी और भरोसा दिलाया कि योजना शीघ्र प्रस्तुत कर दी जाएगी। न्यायालय ने आदेशित किया कि 9 मई 2025 तक अधिसूचित योजना कोर्ट में प्रस्तुत की जाए और 13 मई को अनुपालन की समीक्षा होगी।

दुर्घटना पीड़ितों के लिए अंतरिम राहत योजना

एक अन्य याचिका में अधिवक्ता केसी जैन ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 164ए के तहत सड़क हादसों के पीड़ितों को अंतरिम राहत की मांग की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को आदेश दिया कि चार महीनों के भीतर दुर्घटना पीड़ितों को तात्कालिक मुआवजा प्रदान करने की योजना तैयार की जाए।

याचिका में मांग की गई है कि दुर्घटना में मृत्यु पर तत्काल 5 लाख रुपये की राहत दी जाए। गंभीर चोट पर 2.5 लाख रुपये का मुआवजा मिले। मोटर दुर्घटना न्यायाधिकरणों को पर्याप्त संसाधन मुहैया कराए जाएं। हाईकोर्ट स्तर पर मामलों की निगरानी की व्यवस्था हो। 

अनिवार्य वाहन बीमा पर भी सुप्रीम कोर्ट का संज्ञान

अधिवक्ता केसी जैन की ही एक अन्य याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने वाहन बीमा से जुड़े मुद्दों पर भी गहरी चिंता जताई। देश में 37.77 करोड़ गाड़ियों में से केवल 13.82% गाड़ियों का ही बीमा है। 86.18% वाहन बिना बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसी प्रकार, वाहन मालिकों के लिए जरूरी व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा का आंकड़ा भी मात्र 0.72% है।

इस याचिका में भी सुप्रीम कोर्ट से राहतें मांगी गई हैं। ये हैं, सभी वाहनों के लिए कम से कम 10 वर्षों का थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य किया जाए। वाहन मालिकों के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा अनिवार्य हो। यात्रियों के लिए भी बीमा कवर अनिवार्य किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को रोड सेफ्टी कमेटी को भेजते हुए गहन विवेचना करने और आवश्यक सुधारों का सुझाव देने का निर्देश दिया है।

इन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान याची अधिवक्ता केसी जैन के अलावा न्यायमित्र गौरव अग्रवाल और केंद्र सरकार की ओर से: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी मौजूद रहे।