जेल की दीवारों के भीतर रिश्तों की रौशनी: बरेली सेंट्रल-2 में भाई दूज का भावनात्मक उत्सव
-आरके सिंह- बरेली। दीपोत्सव के अंतिम पर्व भाई दूज ने आज बरेली की सेंट्रल टू जेल को भावनाओं और अपनत्व के रंगों से सराबोर कर दिया। सुबह से ही जेल परिसर में भाई-बहन के मिलन के भावुक दृश्य दिखाई दिए। जेल प्रशासन ने न केवल बहनों को अपने बंदी भाइयों से मिलने का अवसर दिया, बल्कि उनके स्वागत-सत्कार की विशेष तैयारी भी की।
जेल में ही हर व्यवस्था, दिखाई मानवीय संवेदना
वरिष्ठ कारागार अधीक्षक विपिन मिश्रा ने बताया कि पर्व को लेकर कई दिनों से तैयारी चल रही थी। बंदियों और जेल स्टाफ ने मिलकर परिसर को सजाया। बहनों और उनके बच्चों के लिए चाय-नाश्ते की व्यवस्था की गई। सुरक्षा की दृष्टि से पुरुषों का प्रवेश सीमित रखा गया, जबकि बहनों और बच्चों को प्राथमिकता दी गई।
उन्होंने बताया कि भाई दूज के दिन जेल के 674 बंदियों से मिलने के लिए 1005 महिलाएं और 440 बच्चे आए। बाहर से आए पांच भाइयों ने पांच महिला बंदियों (बहनों) से मुलाकात की। जेल के अंदर निरुद्ध छह महिला बंदियों ने जेल में ही निरुद्ध अपने छह पुरुष भाइयों का टीका किया। वरिष्ठ कागागार अधीक्षक के साथ ही जेलर शैलेश कुमार सिंह, डिप्टी जेलर चेतेंद्र सिंह, किरण कुमारी और रीता सागर आदि व्यवस्थाओं को देख रहे थे।
भाई-बहनों के बीच छलकी भावनाएं
जेल परिसर में बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया, मिठाई खिलाई और लंबी उम्र की कामना की। कई बहनें ऊनी वस्त्र, मिठाई और तिलक सामग्री लेकर आई थीं। सीतापुर से आई किशोरी देवी ने बताया कि उसका भाई झूठे प्रेम प्रसंग के मामले में फंसा है, फिर भी वह हर साल भाई दूज पर मिलने आती है। यह दिन मेरे लिए उम्मीद और विश्वास का प्रतीक है।
प्रशासन की अनुकरणीय पहल
जेल प्रशासन ने विशेष निर्देश जारी कर किसी को बाहर से खाना या वस्त्र लाने की आवश्यकता नहीं होने दी। परिसर में ही तिलक, चंदन और मिष्ठान की व्यवस्था की गई थी। महिला बंदियों से मिलने आए पुरुष रिश्तेदारों के लिए भी अलग व्यवस्था रखी गई। सुरक्षा-चेकिंग, प्रवेश व्यवस्था और यातायात नियंत्रण पूरी तरह सुदृढ़ रहा।