बिना कारोबार के लाखों के लोन! पीएनबी की दूरा शाखा में तीन करोड़ के ऋण वितरण की जांच, 37 लोगों के नाम सामने आए
-रवींद्र लवानिया- किरावली। पंजाब नेशनल बैंक की दूरा शाखा में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना और मुद्रा लोन योजना के तहत करीब तीन करोड़ रुपये के ऋण वितरण पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि वर्ष 2024-25 में करीब 37 लोगों के नाम पर कारोबार के लिए ऋण स्वीकृत किए गए, लेकिन कई लाभार्थियों को रकम मिली ही नहीं। बैंक के तत्कालीन प्रबंधक के तबादले के बाद सामने आए मामले की जांच शुरू हो गई है। दिल्ली से पहुंचे जांच अधिकारी ने सात-आठ लाभार्थियों के बयान दर्ज किए हैं।
गारमेंट से डेयरी तक के नाम पर लाखों के ऋण
जानकारी के अनुसार, दूरा शाखा में गारमेंट, फर्नीचर, डेयरी, टेंट हाउस, आटा चक्की और किराना स्टोर जैसे कारोबारों के नाम पर ऋण स्वीकृत किए गए। आरोप है कि कुछ मामलों में ऋण की धनराशि संबंधित लाभार्थियों के बजाय दूसरे खातों में स्थानांतरित कर दी गई। कुछ मामलों में कोटेशन और फर्मों के दस्तावेजों के आधार पर ऋण प्रक्रिया पूरी किए जाने की बात भी सामने आई है। इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
गोपाल के नाम पर दस लाख का ऋण, मजदूरी करते मिले
मामले में कागारौल निवासी गोपाल पुत्र अतर सिंह का नाम प्रमुखता से सामने आया है। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार, गोपाल गारमेंट के नाम पर करीब दस लाख रुपये का ऋण दर्ज है। बैंक प्रबंधक ने जब उनसे किस्त जमा करने को कहा तो गोपाल ने इतनी बड़ी ऋण राशि की जानकारी होने से इनकार किया। बताया गया कि बैंक अधिकारी जब वसूली के लिए उनके घर पहुंचे तो वह मजदूरी करते मिले।
गोपाल का आरोप है कि इकराम नगर निवासी सुरेंद्र पुत्र फौरन सिंह और देवेश पुत्र छिद्दा नगला ढोकला ने मुख्यमंत्री की योजना के तहत मजदूरों को लाभ मिलने की बात कहकर उन्हें दूरा स्थित बैंक बुलाया था। वहां उनसे कागजात पर हस्ताक्षर कराए गए और फोटो खिंचवाने जैसी औपचारिकताएं पूरी कराई गईं।
गोपाल के मुताबिक, उन्हें बताया गया था कि बैंक से करीब 50 हजार रुपये की सहायता मिलेगी, लेकिन बाद में उनके नाम पर दस लाख रुपये का गारमेंट व्यवसाय ऋण स्वीकृत होने की जानकारी मिली। उनका आरोप है कि संबंधित लोगों से संपर्क करने पर उन्हें बाद में धनराशि मिलने का आश्वासन दिया जाता रहा।
कई अन्य लोगों के नाम पर भी दस-दस लाख के ऋण
मामले में नगला अजीता निवासी राममूर्ति और हरि सिंह पुत्रगण महाराज सिंह के नाम पर क्रमशः राम फर्नीचर और हरि टेंट के लिए दस-दस लाख रुपये के ऋण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इसी तरह प्रमोद पुत्र पंचम सिंह के नाम प्रमोद डेयरी फार्म के लिए दस लाख रुपये तथा करन सिंह पुत्र विजेंद्र के नाम करन किराना स्टोर के लिए दस लाख रुपये का मुद्रा ऋण दर्ज होने की बात बताई गई है।
बाहा निवासी कृष्णवीर पुत्र निरंजन के नाम आटा चक्की के लिए पांच लाख रुपये का ऋण दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। उन्देरा गांव में एक ही परिवार से जुड़े कई लोगों के नाम डेयरी कारोबार दर्शाकर पांच-पांच लाख रुपये के ऋण स्वीकृत किए जाने की बात कही गई है। अछनेरा थाना क्षेत्र के ब्यारा निवासी शौकीन खां के नाम भी पांच लाख रुपये के ऋण की जानकारी सामने आई है।
बिना कारोबार के फोटो और दस्तावेजों से ऋण प्रक्रिया पूरी करने का आरोप
कुछ लाभार्थियों का आरोप है कि उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाकर कारोबार से संबंधित बैनर के सामने फोटो खिंचवाए गए और तस्वीरें बैंक में जमा कर दी गईं। उनका कहना है कि योजना के तहत मिलने वाली राशि के बारे में जानकारी मांगने पर उन्हें बाद में पैसा आने की बात कहकर टाल दिया गया।
लाभार्थियों की शिकायतें सामने आने के बाद बैंक स्तर पर जांच शुरू हुई। बताया गया है कि तत्कालीन बैंक प्रबंधक के स्थानांतरण के बाद नए प्रबंधक ने बकाया किस्तों की जांच और संबंधित लोगों से संपर्क करना शुरू किया। इसके बाद मामला जिला स्तर तक पहुंच गया।
दिल्ली से पहुंचे जांच अधिकारी, सात-आठ लाभार्थियों ने दिए बयान
मामले की जांच के लिए दिल्ली से नियुक्त जांच अधिकारी राजीव जैन गुरुवार को पीएनबी की दूरा शाखा पहुंचे। उन्होंने संबंधित लाभार्थियों को बैंक बुलाकर उनकी शिकायतें सुनीं और पक्ष जानने का प्रयास किया। बताया गया कि करीब 13 लोगों से जुड़े मामलों की जांच की जा रही है, लेकिन गुरुवार को सात-आठ लाभार्थी ही बैंक पहुंचे। इन लोगों ने कथित धोखाधड़ी के संबंध में अपने शिकायत पत्र जांच अधिकारी को सौंपे।
जांच अधिकारी राजीव जैन ने बताया कि 13 लोगों से संबंधित मामलों की जांच चल रही है और गुरुवार को सात-आठ लोग बैंक पहुंचे थे। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कारोबारियों के लिए सख्त नियम, फिर बिना सत्यापन कैसे स्वीकृत हुए ऋण?
इस मामले ने बैंकिंग प्रक्रिया और ऋण स्वीकृति में अपनाए जाने वाले सत्यापन के नियमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कारोबार के लिए बैंक से ऋण लेने वाले छोटे-बड़े व्यापारियों को आय, फर्म, बैंक स्टेटमेंट, जीएसटी और कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की जांच सहित कई औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि आरोपों के मुताबिक कुछ लाभार्थियों के पास संबंधित कारोबार ही नहीं था, तो उनके नाम पर लाखों रुपये के ऋण किस आधार पर स्वीकृत किए गए?
जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि ऋण की धनराशि किन खातों में भेजी गई, संबंधित फर्मों का वास्तविक अस्तित्व था या नहीं, लाभार्थियों को कितनी राशि मिली और बैंक की निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं। तत्कालीन बैंक प्रबंधक की भूमिका सहित ऋण स्वीकृति और वितरण से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।