‘लॉर्ड्स ऑफ गिर’: हरविजय सिंह बाहिया की अद्भुत फोटोग्राफी में शेरों की शाही दुनिया और गिर का रोमांच
आगरा। 75 वर्षीय वरिष्ठ उद्यमी, समाजसेवी, स्पोर्ट्स पर्सन और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर हरविजय सिंह बाहिया की नई कॉफी टेबल बुक ‘लॉर्ड्स ऑफ गिर’ का होटल क्लार्क शिराज में रविवार को विमोचन हुआ। 100 पृष्ठों और 106 अद्वितीय फोटोग्राफ वाली यह पुस्तक गिर के जंगलों, बब्बर शेरों, शेरनियों और उनके शावकों के जीवन के रोमांचक और भावनात्मक पहलुओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है। बाहिया ने पुस्तक को अपनी दिवंगत पत्नी इंदु को समर्पित किया और बताया कि यह केवल वन्य जीवन की सुंदरता दिखाने का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों में संरक्षण और जागरूकता फैलाने का प्रयास है।

जंगल केवल पेड़-पौधों और जानवरों का समूह नहीं, बल्कि एक सांस लेने वाला, जीवंत विश्व है। यही संदेश रविवार को ‘लार्ड्स ऑफ गिर’ के विमोचन समारोह में देखने को मिला।
दो सत्रों में पुस्तक विमोचन समारोह संपन्न हुआ। प्रथम सत्र का संचालन करते हुए अंशु खन्ना ने विशेष अतिथि डॉ. दिव्यभानु सिंह चावड़ा, अध्यक्ष, वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर इंडिया और डॉ. एमके रंजीत सिंह झाला, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में योगदान से लेकर उनके वन्य अनुभवों पर चर्चा की।
इसके बाद सुधा कपूर से लॉर्ड्स ऑफ़ गिर की शुरुआत से लेकर पूर्ण होने तक के अनुभव लेखक हरविजय सिंह बाहिया ने साझा किया। उन्होंने कहा कि गिर का जंगल केवल शेरों का घर नहीं है, बल्कि जीवन की एक जटिल और अद्भुत व्यवस्था है। शावकों की खेल-खिलवाड़, शेरनी की शिकारी रणनीति और बब्बर शेर की गरिमा, हर क्षण अपने आप में कहानी कहता हैं।
शेरनी की आंखों में सुरक्षा की चमक, शावकों के खेल के बीच। बब्बर शेर का सन्नाटा भंग करते हुए जंगल में कदम। जैसे पलों को कैमरे की हर क्लिक पर कैद करने की कोशिश की गई है। शावकों की मासूमियत, शेरों की ताकत और जंगल की विविधता को बारीकी से प्रस्तुत किया गया है। शेर 20 घंटे सोते हैं और केवल रात को शिकार करते हैं; इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी बाहिया ने जंगल के हर पहलू को कैमरे में जीवंत किया।
पुस्तक का उद्देश्य केवल वन्य जीवन की सुंदरता दिखाना नहीं, बल्कि लोगों में जंगल और वन्य जीवन के प्रति जागरूकता फैलाना भी है।
एशियाई सिंह: गरिमा, गर्जना और गिर की आत्मा”: डॉ. एमके रंजीत सिंह झाला
परिचर्चा सत्र में अंशु खन्ना के प्रश्नों का उत्तर देते हुए डॉ. एमके रंजीत सिंह झाला ने कहा कि एशियाई सिंह केवल गिर के जंगलों का राजा नहीं, बल्कि भारतीय वन्यजीव इतिहास का गौरव है। उसकी उपस्थिति हमें यह एहसास कराती है कि शक्ति और शालीनता एक साथ कैसे चल सकती हैं।
गिर का हर वृक्ष, हर सूखी पगडंडी और हर झरना इस सिंह की कहानी कहता है, यह कहानी संघर्ष, पुनर्जागरण और सह-अस्तित्व की है।
एक समय था जब भारत में केवल कुछ दर्जन सिंह शेष रह गए थे, लेकिन सामूहिक प्रयासों, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और संवेदनशील प्रशासनिक नीतियों ने इसे फिर से जीवित किया।
हरिविजय सिंह वाहिया की ‘लॉर्ड्स ऑफ गिर’ इस यात्रा को कैमरे की दृष्टि से चित्रित करती है — यह केवल फोटोग्राफी नहीं, बल्कि एक भावनात्मक दस्तावेज है जो बताता है कि जब मनुष्य प्रकृति के साथ चलना सीखता है, तो विलुप्ति भी पुनर्जन्म बन जाती है।
लॉर्ड्स ऑफ गिर ने गिर को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर ला खड़ा किया-डॊ. चावड़ा
डॉ. दिव्यभानु सिंह चावड़ा, अध्यक्ष, वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर इंडिया ने कहा कि आगरा के जाने माने वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर हरविजय सिंह बहिया ने शेर पर अपनी पुस्तक लॉर्ड्स ऑफ गिर द्वारा जूनागढ़, गुजरात के गिर को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर ला खड़ा किया है। वन्यजीव फोटोग्राफी एक अविश्वसनीय रूप से लोकप्रिय शगल है जो आपको बाहर और प्राकृतिक दुनिया के बीच ले जाता है। यह फोटोग्राफी की सबसे कठिन शैलियों में से एक है। वन्यजीव फोटोग्राफी का एक व्यापक स्पेक्ट्रम है। कोई भी चीज़ जो प्राकृतिक दुनिया और उसके सामने आने वाली चुनौतियों का दस्तावेजीकरण करती है, इस शैली में आती है।
हरविजय बाहिया के अविस्मरणीय अनुभव
पुस्तक के विमोचन के बाद लेखक और अतिथियों के बीच जंगल की दुनिया पर जीवंत परिचर्चा हुई। हरविजय बाहिया ने पुस्तक विमोचन के अवसर पर अपने अनुभव साझा किए, जैसे गिर में शेरों के साथ उनका करीबी सामना। शावकों की खेल-खिलवाड़ और शिकारी रणनीति का अवलोकन। वन्य जीवन के संरक्षण के लिए निजी प्रयास और अनुभव।
उन्होंने कहा कि जंगल केवल पेड़-पौधों और जानवरों का संसार नहीं है, यह हमारी संस्कृति, विरासत और अस्तित्व का आईना है। यह पुस्तक मेरी दिवंगत पत्नी इंदु को समर्पित है, जिन्हें मैं अपनी जिंदगी की शेरनी मानता था। आने वाली पीढ़ियों को वन्य जीवन और संरक्षण की महत्ता के प्रति जागरूक करना मेरा उद्देश्य है। हरविजय ने कहा वे बाघ और चीतों पर आधारित नई कॉफी टेबल बुक्स पर काम कर रहे हैं। यदि सफल हुआ, तो वह भारत के पहले फोटोग्राफर होंगे जिन्होंने तेंदूए, शेर, बाघ और चीतों पर अलग-अलग पुस्तकें प्रकाशित की होंगी।
इससे पूर्व वे विगत वर्ष रॉकस्टार ऑफ बेरा कॉफी टेबल बुक लॉन्च कर चुके हैं, जिसमें बहुत करीब से तेंदुए के जीवन को चित्रित एवं वर्णित किया गया था।
इन्होंने कहा बेमिसाल है लॉर्ड्स ऑफ़ गिर
राममोहन कपूर ने कहा कि ‘लार्ड्स ऑफ गिर’ केवल वन्य जीवन की सुंदरता नहीं दिखाती, बल्कि शेरों की गरिमा, शेरनी के संरक्षण की छवि और शावकों की मासूमियत को भी जीवंत करती है। टिम्मी कपूर और नीलिमा डालमिया ने इंदु बाहिया और हरविजय बाहिया के साथ के अनुभव साझा किए।
नातिन बोली, सुपर स्टार हैं विजय पापा
हरविजय बाहिया की नातिन तारिणी ने अपने नाना को सुपरस्टार की उपाधि दी। उसने कहा कि मेरी इंदु मॉम मेरी संरक्षक थीं। वह वाकई में शेरनी थीं। पुत्री मानसी चंद्र, पुत्र हरशिव बाहिया, पुत्रवधू देविका बाहिया ने अपने परिवार के मुखिया की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया।
ये रहे उपस्थित
लॉर्ड्स ऑफ़ गिर के विमोचन समारोह में शहर के वरिष्ठ और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सविता जैन, जयदीप भंडारी, सिमरन भंडारी, मानसी चंद्रा, तारिणी, सिंधु, देविका बाहिया, हरशिव बाहिया, रवानी, जिनीशा, कबीर, हरकृष ने पुस्तक विमोचन किया। राम कपूर, वत्सला प्रभाकर, शीला बहल, पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह, श्रुति सिन्हा, रूपक गुप्ता, अशु मित्तल, डॉ मधु भारद्वाज, सुधीर नारायण, आरपी सिंह, अरुण डांग, देवाशीष भौमिक, दिनेश पांडे, वेदपाल धर, कोमिला धर, डॉ रंजना बंसल, डॉ राजीव भाटिया, राजीव गुप्ता, पूनम सचदेवा, राशि गर्ग, साहिल फौजदार, सूरज तिवारी, अनिल शुक्ला आदि उपस्थित रहे।