प्रयागराज माघ मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का सबूत मांगा

प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेले के दौरान रथ रोके जाने के विरोध में लगातार तीसरे दिन धरने पर बैठे ज्योतिषपीठ के कथित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अब सीधे मेला प्रशासन के निशाने पर आ गए हैं। माघ मेला प्राधिकरण ने उन्हें नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर यह प्रमाणित करने को कहा है कि वे वास्तव में शंकराचार्य हैं।

Jan 20, 2026 - 14:53
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प्रयागराज माघ मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का सबूत मांगा

सोमवार आधी रात में माघ मेला क्षेत्र के एक राजस्व अधिकारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर पहुंचे और उनके शिष्यों को नोटिस सौंपने का प्रयास किया। शिष्यों ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद मंगलवार सुबह यह अधिकारी दोबारा शिविर पहुंचे और शिविर के मुख्य द्वार पर नोटिस चस्पा कर दिया। यह नोटिस माघ मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष द्वारा जारी किया गया है।

नोटिस में उल्लेख किया गया है कि ज्योतिषपीठ में शंकराचार्य पद से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सर्वोच्च न्यायालय ने 14 अक्तूबर 2022 को आदेश दिया था कि अंतिम निर्णय आने तक किसी भी व्यक्ति को शंकराचार्य घोषित नहीं किया जा सकता और न ही किसी का पट्टाभिषेक किया जा सकता है। कोर्ट ने इस पद पर किसी को बैठाने पर भी स्पष्ट रोक लगा रखी है। अब तक इस मामले में कोई नया आदेश नहीं आया है और केस अभी भी लंबित है।

मेला प्रशासन का आरोप है कि इसके बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले में अपने शिविर पर लगे बोर्ड में खुद को ‘ज्योतिषपीठ शंकराचार्य’ लिखा हुआ है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर नोटिस जारी कर उनसे पूछा गया है कि वे किस अधिकार और किस आधार पर स्वयं को शंकराचार्य लिख रहे हैं।

वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस नोटिस को पूरी तरह खारिज करते नजर आए। इससे पहले पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था कि शंकराचार्य वही होता है, जिसे बाकी पीठ मान्यता दें। उनके अनुसार चार में से दो पीठ उन्हें शंकराचार्य स्वीकार करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे पूर्व में भी माघ मेले में आए हैं, सभी के साथ स्नान किया है और तब किसी ने प्रमाण नहीं मांगा। उन्होंने तीखे शब्दों में सवाल उठाया कि क्या अब प्रशासन तय करेगा कि शंकराचार्य कौन है। यह अधिकार तो देश के राष्ट्रपति के पास भी नहीं है।

रथ रोके जाने के मामले में नाराजगी जाहिर करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमवार की प्रेस वार्ता में साफ कहा था कि जब तक मेला प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता, वे अपने शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे। उन्होंने ऐलान किया कि वे हर माघ मेले में प्रयागराज आएंगे, लेकिन शिविर में नहीं, बल्कि फुटपाथ पर सोएंगे।

SP_Singh AURGURU Editor