बज़्म-ए-ग़ालिब में गूंजा शायरी का जादू, 228वीं जयंती पर ग़ालिब को भावपूर्ण श्रद्धांजलि
आगरा। शायरी की दुनिया के आला शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की 228वीं जयंती के अवसर पर ग्रैंड होटल के सभागार में भव्य बज़्म-ए-ग़ालिब का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शायरी, ग़ज़ल, शास्त्रीय संगीत और भावाभिव्यक्ति के माध्यम से ग़ालिब की अमर रचनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। पूरा सभागार ग़ालिब की शायरी के रंग में रंगा नजर आया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मिर्ज़ा ग़ालिब के चित्र के सम्मुख कैलिफोर्निया से पधारी सुश्री प्राची दीक्षित, डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास, डीसीपी वेस्ट अतुल शर्मा, एडीएम ई आज़ाद भगत सिंह, सुधीर नारायण एवं अरुण डंग द्वारा शमा रोशन कर किया गया। अतिथियों का स्वागत अमृता विद्या एजुकेशन फॉर इम्मोर्टालिटी के अनिल शर्मा ने किया।
इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गायक सुधीर नारायण एवं उनके साथी कलाकार कृतिका, हर्षित, अमन शर्मा, देश दीप, प्रीति, खुशी सोनी आदि ने मिर्ज़ा ग़ालिब की प्रसिद्ध ग़ज़लों की प्रस्तुति दी।
“दोस्त ग़मख्वारी में मेरी सई फरमावेंगे क्या”,
“ज़ख़्म के भरने तलक नाख़ुन न बढ़ जाएंगे क्या”,
“हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले”,
“नुक्ताचीं है ग़मे दिल”
जैसी ग़ज़लों को श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा।
नूपुर अकादमी के कलाकारों ने तीन ताल की बंदिश प्रस्तुत कर शास्त्रीय संगीत का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। वहीं सुश्री प्राची दीक्षित ने- उनको देखने से जो आ जाती है मुंह पर रौनक... ग़ज़ल पर भावपूर्ण अभिव्यक्ति प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रोफेसर आन्शवना सक्सेना ने सुभाष सक्सेना के साथ- हर एक बात पर कहते हो तुम कि तू क्या है...ग़ज़ल की सशक्त प्रस्तुति दी।
संगत में राज मैसी, राजू पांडे, अनिल एवं देश दीप ने अपनी कला से प्रस्तुतियों को और प्रभावी बनाया। इस अवसर पर अरुण डंग ने ग़ालिब की शायरी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ग़ालिब की रचनाएं इतनी सशक्त हैं कि उनका एक भी शब्द इधर-उधर नहीं किया जा सकता। उनकी व्यंग्यात्मक शैली भी बेहद शालीन और गहरी है।
कार्यक्रम में कवि सुशील सरित ने कहा—
“एहसास की किताब है ग़ालिब की शायरी,
महका हुआ गुलाब है ग़ालिब की शायरी,
उतरे न चढ़के जो कभी उम्र भर सरित,
ऐसी अजब शराब है ग़ालिब की शायरी।”
यह आयोजन आगरा की आवाज़ 90.4 एफएम डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, साहित्य संगीत संगम, अमृत विद्या एजुकेशन फॉर इम्मोर्टालिटी, कुंदन सोप और कल्याण कल्चर के सहयोग से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में एडवोकेट अशोक चौबे, डॉ. मधु भारद्वाज, पूजा सक्सेना, डॉ. अश्वनी श्रीवास्तव, विशाल रियाज़, असलम सलीमी, डॉ. मधुरिमा शर्मा, इस्लाम कादरी, विनय सक्सेना, कांति नेगी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन सुशील सरित ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सुधीर नारायण ने किया।