शिव–शक्ति की दिव्यता में डूबा महाकालेश्वर धाम, 12 जोड़ों ने किया द्वादश ज्योतिर्लिंग पूजन
आगरा। सावन मास की पावन छटा में दयालबाग स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर शिवमय हो उठा, जब शिव महापुराण कथा के छठे दिन द्वादश ज्योतिर्लिंग पूजन का दिव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। इस अलौकिक अनुष्ठान में 12 श्रद्धालु जोड़ों ने सपत्नीक प्रत्येक ज्योतिर्लिंग का विधिपूर्वक पूजन कर शिव–शक्ति के प्रति समर्पण व्यक्त किया।
-श्रद्धा–समर्पण और आत्मचेतना का अद्भुत संगम, कथा में उजागर हुई द्वादश ज्योतिर्लिंगों की अलौकिक महिमा
ज्योतिर्लिंगों की महिमा का हुआ विस्तृत वर्णन
कथा व्यास आचार्य मृदुलकांत शास्त्री ने श्रद्धालुओं को बताया कि द्वादश ज्योतिर्लिंग शिव के वे दिव्य स्थल हैं जहां उन्होंने भक्तों को साक्षात दर्शन दिए। उन्होंने कहा कि सोमनाथ से लेकर घृष्णेश्वर तक के ये बारह स्वरूप आत्मा के द्वार हैं, जो परम सत्य की ओर ले जाते हैं। श्रद्धा से स्मरण करने मात्र से मनुष्य जन्म–मरण के बंधनों से मुक्त हो सकता है।
पूजन में सहभागी बने 12 श्रद्धालु जोड़े
प्रातःकाल महा रुद्राभिषेक एवं पार्थिव शिवलिंग निर्माण के पश्चात प्रतीकात्मक 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की गई। पूजन आचार्य मृदुलकांत शास्त्री के मार्गदर्शन में हुआ, जिसमें सुनील वशिष्ठ, सुनील शर्मा, राम चरण शर्मा, नवदीप, प्रशांत मित्तल, विपिन पाराशर, प्रदीप श्रीवास्तव, सुभाष गिरी, देवांशु गुप्ता, कैलाश नाथ द्विवेदी, पवन शर्मा एवं राजुल शर्मा सपत्नीक सम्मिलित हुए।
व्यास पूजन एवं आयोजकों को साधुवाद
व्यास पूजन लॉयंस क्लब प्रयास की पूर्व अध्यक्ष एवं माया मित्तल चैरिटेबल ट्रस्ट की अशु मित्तल ने किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन आज के यांत्रिक जीवन में मानसिक शांति और धर्म मार्ग की प्रेरणा का सशक्त माध्यम है। उन्होंने संयोजकों को ऐसे आध्यात्मिक पर्व के लिए साधुवाद भी दिया।
मंदिर परिसर गूंजा जयघोषों से
पूजन उपरांत मंदिर परिसर हर हर महादेव, जय शिव शंकर और ॐ नमः शिवाय के जयघोषों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण के बीच शिव भाव में लीन होकर दिव्यता का अनुभव किया।
यह आत्मचेतना का जागरण
मुख्य संयोजक आचार्य सुनील वशिष्ठ ने बताया कि यह पूजन केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भीतर के शिव तत्व को जाग्रत करने का एक आत्मिक उपक्रम है। उन्होंने इसे भक्तों की आत्मा और शिव के मध्य सीधा संवाद बताया।