'भारत-ईयू के बीच हुआ बड़ा समझौता', पीएम मोदी ने किया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का ऐलान, बताया- उद्योग, ऊर्जा क्षेत्र को फायदा, मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी, सर्विस सेक्टर को मिलेगा सहारा

पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। भारत रिन्यूएबल एनर्जी, तेल और गैस जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है ।

Jan 27, 2026 - 14:43
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'भारत-ईयू के बीच हुआ बड़ा समझौता', पीएम मोदी ने किया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का ऐलान, बताया- उद्योग, ऊर्जा क्षेत्र को फायदा, मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी, सर्विस सेक्टर को मिलेगा सहारा


नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 को संबोधित करते हुए भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए बड़े फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूत साझेदारी का प्रतीक है और इसका सीधा फायदा भारत के उद्योग, ऊर्जा क्षेत्र और आम लोगों को मिलेगा। पीएम मोदी ने कहा कि यह डील भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करेगी और सर्विस सेक्टर को नया सहारा देगी।

पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। भारत रिन्यूएबल एनर्जी, तेल और गैस जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और दुनिया के कई देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के भारत में हर सेक्टर में सुधार हो रहे हैं। इन सुधारों की वजह से देश में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है और नए रोजगार के मौके बन रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत-ईयू-एफटीए, भारत और ब्रिटेन के बीच पिछले साल साइन हुए ट्रेड एग्रीमेंट को भी सपोर्ट करेगा। इससे यूरोप के साथ भारत का कुल व्यापार और मजबूत होगा। इस समझौते का मकसद भारत और ईयू के बीच दो-तरफा व्यापार को बढ़ाना और आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देना है। सरकार का मानना है कि इससे निवेश, रोजगार और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।

इस समझौते को 'मदर ऑफ ऑल डील' कहा जा रहा है। पीएम मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि भारत-ईयूएफटीए, भारत और ब्रिटेन के बीच पिछले साल साइन हुए ट्रेड एग्रीमेंट को भी सपोर्ट करेगा. इससे यूरोप के साथ भारत का कुल व्यापार और मजबूत होगा. इस समझौते का मकसद भारत और EU के बीच दो-तरफा व्यापार को बढ़ाना और आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देना है. सरकार का मानना है कि इससे निवेश, रोजगार और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे.

भारत और ईयू के बीच यह समझौता 18 साल से अटका हुआ था, जो अब जाकर पूरा हुआ है। यह 'एग्रीमेंट इन प्रिंसिपल' भारत की सबसे बड़ी मार्केट ओपनिंग में से एक बन गया है. 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए यूरोपीय कमीशन प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा थे। इस दौरान हाई-लेवल मीटिंग्स हुईं और माहौल बहुत पॉजिटिव बन गया।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ महत्वपूर्ण नया समझौता 140 करोड़ भारतीयों और यूरोपीय नागरिकों के लिए बड़ा अवसर लेकर आया है, जो दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण है। यह समझौता वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के एक-तिहाई हिस्से को कवर करता है।

हालांकि, कुछ भारतीय इंडस्ट्रीज (जो हाई टैरिफ से प्रोटेक्टेड थीं) को कॉम्पिटिशन बढ़ने से चिंता है। इसलिए ट्रांजिशन पीरियड और सेफगार्ड्स की मांग हो सकती है। यह डील सिर्फ व्यापार की नहीं, बल्कि भारत और यूरोप के बीच गहरे आर्थिक रिश्ते की शुरुआत है। दुनिया में सप्लाई चेन बदल रही है और भारत-ईयू का यह समझौता दोनों को मजबूत बनाएगा।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन गोवा में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने किया। कार्यक्रम में कई देशों के मंत्री, उद्योग जगत के नेता और नीति विशेषज्ञ शामिल हुए.। इस मौके पर संयुक्त अरब अमीरात के उद्योग और उन्नत तकनीक मंत्री सुल्तान अहमद अल जाबेर और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।

दिल्ली के हैदराबाद हाउस में EU के चीफ एंटोनियो कोस्टा ने कहा, 'हम वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम करेंगे। भारत और ईयू करार से स्थिरता का नया दौर आएगा। इस डील से 2 बड़े लोकतंत्र साथ आए हैं. शांति के लिए बातचीत जरूरी है।'

भारत-ईयू में समझौता ऐतिहासिक - एंटोनियो कोस्टा

ईयू काउंसल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'भारत दुनिया की सबसे तेज प्रगति करती मेट्रो इकोनॉमी वाला देश है। इस वजह से एफटीए और ज्यादा ऐतिहासिक बन जाता है, जिससे 200 करोड़ लोगों को फायदा होगा। भारत और यूरोपीय यूनियन भरोसेमंद साझेदार हैं।'