राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल: गोविंद देव गिरि महासचिव, महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव नए ट्रस्टी
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अयोध्या की मणिरामदास छावनी में हुई बैठक में अपने संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किए। ट्रस्ट ने कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि को महासचिव की जिम्मेदारी सौंप दी, जबकि महेश भागचंदका, वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव को नए ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया। इसके साथ ही राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति का भी निर्णय लिया गया।
मणिरामदास छावनी में हुई महत्वपूर्ण बैठक
बैठक में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, महंत कमलनयन दास, महंत दिनेंद्र दास, महंत गोविंद देव गिरि, डॉ. कृष्ण मोहन सहित ट्रस्ट के अन्य सदस्य मौजूद रहे। बैठक में ट्रस्ट के रिक्त पदों को भरने के साथ राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और भविष्य में मंदिर प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने पर चर्चा हुई।
गोविंद देव गिरि बने महासचिव
महंत गोविंद देव गिरि अब तक ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। महासचिव पद पर चंपत राय के बाद डॉ. कृष्ण मोहन को अंतरिम जिम्मेदारी दी गई थी। अब गोविंद देव गिरि को महासचिव बनाए जाने के साथ ट्रस्ट के शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में स्थायी बदलाव किया गया है। कोषाध्यक्ष के पद को लेकर भी ट्रस्ट आगे निर्णय करेगा।
तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति
ट्रस्ट में रिक्त तीन पदों पर महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव को शामिल किया गया है। दिल्ली निवासी महेश भागचंदका को विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंघल का रिश्तेदार बताया जाता है। वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय रामजन्मभूमि से जुड़े न्यायिक मामलों में रामलला की ओर से पैरवी कर चुके हैं। वहीं शिकोहाबाद की निर्मला यादव ट्रस्ट में शामिल होने वाली नई महिला सदस्य हैं।
बढ़ते मंदिर प्रबंधन के बीच बड़ा बदलाव
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के साथ दर्शन व्यवस्था, धार्मिक आयोजनों, दान-चढ़ावे, सुरक्षा और अन्य प्रशासनिक गतिविधियों का दायरा भी बढ़ रहा है। ऐसे समय में महासचिव के रूप में नई जिम्मेदारी, तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति और पूर्णकालिक सीईओ की व्यवस्था ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव है। अब इन नई व्यवस्थाओं के जरिए मंदिर प्रबंधन को अधिक प्रभावी और संस्थागत बनाने की जिम्मेदारी ट्रस्ट के सामने होगी।