बरेली मंडल में मतदाता सूची पर बड़ा खुलासा: 20 लाख अपात्र, 12.13 लाख की मैपिंग नहीं, बरेली कैंट में 36% अपात्र वोटर

-रमेश कुमार सिंह- बरेली। बरेली मंडल के चार जिलों की 25 विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कुल 96 लाख मतदाताओं में से 20 लाख मतदाता अपात्र पाए गए हैं, जबकि 12.13 लाख मतदाताओं की वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग नहीं हो सकी है। चौंकाने वाली बात यह है कि बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्र में 36 प्रतिशत फर्जी/अपात्र मतदाता पाए गए, जो मंडल में सर्वाधिक हैं। इसके अलावा बरेली शहर में यह आंकड़ा 35.89 प्रतिशत और शाहजहांपुर नगर में 33.84 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इतने मतों में सामान्यतः प्रत्याशी विधायक बन जाता है।

Dec 13, 2025 - 12:18
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बरेली मंडल में मतदाता सूची पर बड़ा खुलासा: 20 लाख अपात्र, 12.13 लाख की मैपिंग नहीं, बरेली कैंट में 36% अपात्र वोटर

मंडलायुक्त का सख्त रुख, कुछ क्षेत्रों में विस्तृत जांच के आदेश

मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी ने आंकड़ों पर हैरानी जताते हुए कहा कि एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) अभियान के दौरान जिन विधानसभा क्षेत्रों में अपात्र मतदाताओं की संख्या अधिक मिली है, वहां वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत जांच कराई जाएगी। अन्य क्षेत्रों में भी दोबारा सत्यापन कराया जाएगा ताकि मतदाता सूची में किसी तरह की त्रुटि न रह जाए।

बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्र के 3.83 लाख मतदाताओं में से 1.38 लाख अपात्र मिले हैं। इनमें 16,959 हजार मृतक, 62 हजार लोग अनुपस्थित पाए गए हैं। 44 हजार लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं। 8,488 लोग दो बूथों पर मतदाता हैं।

बरेली शहर में वोटरों की कुल संख्या 4.78 लाख है। इसमें 35.89 फीसदी यानी 1.68 लाख वोटर अपात्र पाए गए हैं। इसमें 19 हजार मृतक, 89 वोटर अनुपस्थित मिले। 51 हजार मतदाता दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं। शाहजहांपुर नगर विधानसभा क्षेत्र के 4.36 लाख वोटरों में से 1.47 लाख अपात्र मिले हैं।

बीएलए नियुक्ति में बसपा आगे

बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करने में बसपा सबसे आगे है। बसपा ने जिले भर में 3494 बूथों पर बीएलए नियुक्त किए हैं, जबकि भाजपा ने 3,489 और सपा ने 2,678 बीएलए बनाए हैं। कांग्रेस ने 2,101 बीएलए नियुक्त किए हैं। अन्य दलों का खाता तक नहीं खुला है।

मतदाता सूची में सामने आई इन भारी विसंगतियों ने प्रशासन और राजनीतिक दलों, दोनों की चिंता बढ़ा दी है। मंडलायुक्त के निर्देश पर होने वाला पुनः सत्यापन आगामी चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

SP_Singh AURGURU Editor