'Cy-वज्र अभियान' से साइबर माफिया पर बड़ा प्रहार: 91 गिरफ्तार, ₹26.76 लाख नकद, क्रिप्टो और फर्जी दस्तावेज बरामद
-आरके सिंह- बरेली। साइबर अपराधियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस ने बरेली परिक्षेत्र में बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए विशेष “Cy-वज्र अभियान” के तहत साइबर ठगी करने वाले गिरोहों की कमर तोड़ दी। सात दिन तक चले इस अभियान में पुलिस ने चार जिलों में 83 मुकदमे दर्ज कर 91 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान ₹26.76 लाख से अधिक नकदी, 72 मोबाइल फोन, 31 एटीएम कार्ड, फर्जी आधार कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल उपकरण भी बरामद किए गए। पुलिस ने जांच में ऐसे अंतर्राज्यीय गिरोहों का भी खुलासा किया, जो मोबाइल चोरी से लेकर बैंक खातों के दुरुपयोग और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे।
बरेली परिक्षेत्र के डीआईजी अजय कुमार साहनी ने बुधवार को मीडिया को बताया कि साइबर अपराधों की रोकथाम और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के उद्देश्य से 7 जुलाई से 13 जुलाई तक विशेष “Cy-वज्र अभियान” चलाया गया। अभियान के तहत बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर जिलों में साइबर अपराधियों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की गई।
उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान जनपदों की साइबर सेल, साइबर थाना, एसओजी और स्थानीय थाना पुलिस की संयुक्त टीमों ने तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल सर्विलांस, बैंकिंग विवरणों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का गहन विश्लेषण कर शिकायतों की जांच की। इसके आधार पर साइबर अपराधों में संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमे दर्ज कर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की गई।
डीआईजी ने बताया कि अभियान के दौरान 83 अभियोग पंजीकृत किए गए और 91 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹26,76,740 नकद, 72 मोबाइल फोन, 31 एटीएम कार्ड, तीन फर्जी आधार कार्ड, एक पेटीएम स्कैनर, 940 यूएसडीटी (USDT) क्रिप्टोकरेंसी तथा एक SEED क्रिप्टो उपकरण बरामद किया।
उन्होंने बताया कि शाहजहांपुर के थाना कांट क्षेत्र में सक्रिय गिरोह लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खातों की जानकारी हासिल करता था। आरोपी मोबाइल में एसएमएस एपीके (APK) इंस्टॉल कराकर बैंक खातों से जुड़े ओटीपी और अन्य बैंकिंग संदेश अपने हैंडलरों तक पहुंचाते थे। इसके बाद खातों से अवैध रूप से धन निकालकर साइबर ठगी की जाती थी। इस ठगी से मिलने वाला कमीशन गिरोह के सदस्यों को USDT क्रिप्टोकरेंसी के रूप में दिया जाता था।
डीआईजी अजय कुमार साहनी ने बताया कि जनपद बरेली के साइबर क्राइम थाना ने एक अंतर्राज्यीय मोबाइल चोरी एवं साइबर ठगी गिरोह का भी पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया कि झारखंड के गिरोह के सदस्य विभिन्न जिलों में आकर रेलवे स्टेशन के आसपास किराये पर ठहरते थे। वे स्थानीय ऑटो और टैक्सी चालकों को अधिक पैसे देकर अपने साथ मिला लेते थे और भीड़भाड़ वाले बाजारों तथा साप्ताहिक हाटों में मोबाइल चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे।
चोरी किए गए मोबाइल फोन झारखंड के नाला और जामताड़ा स्थित साइबर अपराधियों तक पहुंचाए जाते थे। वहां मोबाइल में उपलब्ध बैंकिंग और डिजिटल जानकारी का दुरुपयोग कर साइबर ठगी की जाती थी। गिरोह मोबाइल चोरी के लिए एक नाबालिग बालक का भी इस्तेमाल करता था और लगभग 100 मोबाइल चोरी करने के बाद वापस झारखंड लौट जाता था।
डीआईजी ने कहा कि साइबर अपराधों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त अभियान जारी रहेगा। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध लिंक, एपीके फाइल या बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें और साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना दें।