उत्तर पश्चिम दिशा के भूखंड और मकानों का सही उपयोग कीजिए, अमीर और गरीब बना देते हैं
उत्तर-पश्चिम कोने को वायव्य कोण भी कहा जाता है। यह दिशा अति महत्वपूर्ण है। यह दिशा इसके उपयोग के आधार पर किसी को भी अमीर अथवा गरीब बना सकती है। इस दिशा के अधिपति वायु देव हैं। इन्हें 'सद्गति' भी कहा जाता है, जिसका तात्पर्य यह है कि ये हमेशा चलायमान हैं। ये सभी जीवों के लिए आधारभूत ऊर्जा हैं क्योंकि वायु पृथ्वी पर जीवन का आधार है।
इनका रंग आसमानी नीला है। इनके एक मुख तथा दो भुजाएं हैं। इनकी देवी को मोहिनी कहा जाता है। इनके दाएं हाथ में सोने की छड़ी तथा एक झंडा है तथा इनके बाएं हाथ में जीवन का वरदान है। इसका तात्पर्य यह है कि ये आसानी से निवासियों को सब कुछ दे देते हैं। इनकी सवारी हिरण है। ये काफी शक्तिशाली हैं तथा बेहिचक इनमें शुभ अथवा अशुभ करने की योग्यता है। यह दिशा महिलाओं के लिए अधिक महत्वपूर्ण है। उनका जीवन तथा बच्चों का जन्म तथा उनका विकास इस दिशा के उपयोग पर निर्भर करता है।
जो लोग अच्छी तरह से उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर निर्मित भवन में रहते हैं, उन्हें हर प्रकार का सम्मान प्राप्त होता है तथा उनकी उन्नति वैज्ञानिक रूप से होती है। यह भ्रूण के निर्माण, उसके विकास एवं सुगमता से प्रसव के लिए भी उत्तरदायी है। इस दिशा में दोष होने से महिलाओं का गर्भपात होता रहता है। वायु निवासियों को शिक्षा एवं सुख भी प्रदान करते हैं।
हिंदू पुराणों में कहा गया है कि ईश्वर के ऊर्जा की छह बूंदें वायुदेव द्वारा एक तालाब में लायी गयीं। उसी से भगवान कार्तिक की उत्पत्ति हुई, जिनके छह मुख हैं। इससे यह प्रदर्शित होता है कि वायु ही महिलाओं में भ्रूण के विकास के लिए उत्तरदायी है। यदि इस दिशा की ओर वृद्धि हो तो लोगों को हमेशा यात्राएं करनी पड़ती हैं तथा इधर से उधर घूमना पड़ता है।
वायु कोने में वृद्धि का मतलब है ईशान का कम हो जाना जो कि शुभ नहीं है। इसके कारण लोगों को अकारण घर से बाहर रहना पड़ता है तथा अनेक प्रकार की कठिनाइयां एवं दुःख झेलने पड़ते हैं। इन्हें दूसरे स्थान पर जाकर भी रहना पड़ सकता है। इनके खर्च नियंत्रण में नहीं रहते, जिसके कारण दरिद्रता आ जाती है।
यदि यह दिशा किसी कारण से बढ़ी हुई है अथवा इस दिशा में गड्ढा, तालाब, कुआं इत्यादि है तो इससे अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। महिलाएं झगड़ालू हो जाती हैं तथा अनेक प्रकार के विवाद उत्पन्न हो जाते हैं। इस दिशा का उचित तरीके से उपयोग होना चाहिए। इससे अधिक समृद्धि, सुख, संतान होंगे। यह लंबी आयु, स्वास्थ्य एवं सम्मान तथा सरकारी अधिकारियों से सहायता भी प्रदान करेगा।
-डॉ० अरविन्द मिश्र
ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद
भविष्य बनाओ ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान, शॉप नं. 21, ब्लॉक नं. 25, ग्राउंड फ्लोर (निकट आहार रेस्टोरेंट), संजय प्लेस, आगरा।
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