रेप की घटना पर ममता बनर्जी के अजब बयान, बोलीं- लड़कियां रात में घर से बाहर नहीं निकलें

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक छात्रा से दुष्कर्म की घटना पर कहा कि लड़कियों को रात में बाहर नहीं निकलना चाहिए। यह बयान पीड़ित को दोषी ठहराने वाला और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने में राज्य सरकार की विफलता को दिखाता है। मुख्यमंत्री से सहानुभूति और ठोस कदम उठाने की अपेक्षा थी, न कि प्रतिबंध लगाने की।

Oct 12, 2025 - 22:42
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रेप की घटना पर ममता बनर्जी के अजब बयान, बोलीं- लड़कियां रात में घर से बाहर नहीं निकलें

कोलकाता। ओडिशा के जलेश्वर की रहने वाली और दुर्गापुर के शिवपुर इलाके में स्थित आईक्यू सिटी मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा अपने एक पुरुष मित्र के साथ बाहर गई थी तभी शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ बजे कॉलेज के गेट के पास कुछ लोगों ने उसे रोक लिया और उसे घसीटते हुए जंगली इलाके में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। 23 वर्षीय छात्रा के पिता ने बताया कि उसका दोस्त भाग गया है और परिवार को शक है कि वह भी इसमें शामिल है।

वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का घटना पर दिया गया यह बयान कि ‘लड़कियों को रात में बाहर नहीं निकलना चाहिए’ न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि एक निर्वाचित महिला मुख्यमंत्री के पद की गरिमा और जिम्मेदारी के भी विपरीत है। यह टिप्पणी एक ऐसी मानसिकता को दर्शाती है जो अपराध के लिए अपराधियों को नहीं, बल्कि पीड़ितों को ही दोषी ठहराती है। यह बेहद निराशाजनक और खतरनाक है।  

किसी भी दुष्कर्म की घटना के बाद एक संवदेनशील और जिम्मेदार नेता से अपेक्षा की जाती है कि वह पीड़ित के प्रति सहानुभूति व्यक्त करे, न्याय सुनिश्चित करने का संकल्प ले और महिला सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का भरोसा दे। लेकिन, मुख्यमंत्री बनर्जी ने इसके बजाय लड़की के रात में बाहर होने पर ही सवाल उठाकर पूरी बहस का रुख ही मोड़ दिया। यह एक क्लासिक विक्टिम-ब्लेमिंग (पीड़ित को दोषी ठहराना) का उदाहरण है। यह बयान परोक्ष रूप से यह संकेत देता है कि अगर लड़की रात में बाहर न होती तो शायद यह अपराध न होता। यह सोच न केवल गलत है, बल्कि समाज में महिला-विरोधी रूढ़ियों को और मजबूत करती है।

यह एक महिला के मौलिक अधिकार का हनन है कि उसे समय की पाबंदी के कारण अपनी सुरक्षा को लेकर डरना पड़े। रात के समय सड़कों पर बेखौफ घूमना पुरुषों का विशेषाधिकार क्यों होना चाहिए? मुख्यमंत्री का काम सड़कों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाना है, न कि महिलाओं को घर की चारदीवारी में कैद कर देना। उनका बयान प्रभावी रूप से यह स्वीकार करता है कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है और अब वह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए लड़कियों पर ही प्रतिबंध लगा रही है। एक महिला मुख्यमंत्री होने के नाते, यह दोहरा झटका है, क्योंकि महिलाएं उनसे बेहतर समझ और अधिक कड़े कदम उठाने की उम्मीद करती हैं।

यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी ने यौन हिंसा के मामलों पर इस तरह के असंवेदनशील बयान दिए हैं। अतीत में भी उनके कुछ बयान विवादों का विषय रहे हैं। इस तरह के संवेदनशील मामलों को अन्य राज्यों की घटनाओं से तुलना करके या उनका राजनीतिकरण करके, वह मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश करती हैं। ओडिशा के पुरी बीच की घटना का जिक्र करना इस बात का प्रमाण है। एक जघन्य अपराध पर उनका प्राथमिक ध्यान अपनी सरकार का बचाव करना और विपक्ष पर हमला करना होता है, न कि पीड़ित को न्याय दिलाना।