ब्रज रस और राग मल्हार में डूबा 'मनवा', सावन के मौके पर हुआ सांस्कृतिक उत्सव
आगरा। देवनागरी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, आगरा द्वारा सावन के पहले सोमवार की पूर्व संध्या पर आयोजित 'मल्हार मनवा' कार्यक्रम में ब्रज की सांस्कृतिक आत्मा, राग मल्हार और लोक गायन की समृद्ध परंपरा को सुरों व शब्दों के संगम से सजाया गया।
-देवनागरी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में मल्हार संध्या में गूंजे ब्रज के सुर और शब्द
नुनिहाई के ब्रह्म नगर स्थित दुर्गा भवन में हुए इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आचार्य नीरज शास्त्री (मथुरा) ने कहा, पौराणिक समय से राग मल्हार को ब्रज लोक गायन की आत्मा माना गया है। मल्हार लेखन और गायन, ब्रज संस्कृति को जीवंत रखने की अनिवार्य कड़ी है।
राग मल्हार में डूबा साहित्यिक मंच
संस्कार भारती के वरिष्ठ सदस्य राज बहादुर राज ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि मल्हार केवल सुर नहीं, यह भारत की लोक आत्मा की अभिव्यक्ति है।
अध्यक्षता कर रहे कवि डॉ. राजेन्द्र मिलन ने मल्हार विधा में कजरी और रागिनी जैसे लोक काव्यरूपों की महत्ता पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता डॉ. रामेन्द्र शर्मा 'रवि' ने कहा कि यदि सावन में मल्हार सृजन और गायन न हो, तो ब्रज की साधना अधूरी मानी जाएगी।
विशिष्ट अतिथि डॉ. सुकेशिनी दीक्षित ने ब्रजभाषा में नवगीत प्रस्तुति दी और लोक-संवेदना की चेतना को कविता में रचने का आग्रह किया।
गुरु को समर्पित सम्मान
कार्यक्रम में वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. गोकुल चंद्र शर्मा के करकमलों से आदर्श शिक्षक श्री उमेश चंद्र शर्मा को श्री गुरुवे नमः सम्मान से अलंकृत किया गया। यह क्षण ब्रज शिक्षा परंपरा के प्रति सम्मान का भावपूर्ण उदाहरण बना।
मल्हार के सुरों में बही शाम
कार्यक्रम में विनय बंसल, डॉ. अनामिका भारद्वाज, प्रभुदत्त उपाध्याय, डॉ. हरवीर परमार, रामजीलाल धनगर, कमलेश शर्मा, अनुज शर्मा, शिवानी शर्मा, प्रियंका शर्मा, आराध्या शर्मा, मास्टर अभिनव शर्मा आदि ने राग मल्हार पर आधारित प्रस्तुति देकर सावन की सांस्कृतिक गरिमा को उच्च आयाम दिए।
कार्यक्रम का कुशल संचालन कवि डॉ. यशोयश ने किया। उन्होंने सभी आमंत्रित कवियों एवं अतिथियों का आभार व अभिनंदन किया।
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