यमुना में बाढ़ से मथुरा बेहाल: घाट डूबे, खादर की कॊलोनियों के साथ दर्जनों गांव जलमग्न
मथुरा। यमुना नदी ने शुक्रवार को अब तक का सबसे ऊंचा जलस्तर छू लिया। शाम चार बजे प्रयागघाट पर पानी की ऊंचाई 166.82 मीटर दर्ज की गई। इस बढ़ोतरी से मथुरा के अधिकांश घाट जलमग्न हो गए हैं, जबकि खादर की कालोनियों और करीब तीन दर्जन गांव प्रभावित हो चुके हैं। प्रशासन को आशंका है कि रात में जल स्तर और बढ़ सकता है।
किसानों की जमीन और फसलें जलमग्न
लगातार बाढ़ से नौहझील, मांट, छाता, मथुरा, वृंदावन और महावन तहसील की हजारों एकड़ कृषि भूमि पानी में डूब चुकी है। ज्वार, बाजरा, धान, मक्का और सब्जियों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसानों का आरोप है कि राजस्व विभाग की ओर से सर्वे तक शुरू नहीं हुआ, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
जल छोड़ने से बढ़ा संकट
सिंचाई विभाग के कंट्रोल रूम के अनुसार, यह जलस्तर अब तक का सबसे अधिक रिकॉर्ड किया गया है। गोकुल बैराज से आगरा की ओर 1,20,823 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं दिल्ली की ओर से ओखला बैराज से 2,35,550 क्यूसेक और ताजेवाला बैराज से 58,344 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया। अचानक डिस्चार्ज बढ़ने से मथुरा और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का संकट और गहराने की संभावना है।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया है, मगर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि अब तक राहत कार्य नाकाफी हैं। खेत जलमग्न होने से लोगों की आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है।