महाराष्ट्र हज कमेटी में हिंदू सीईओ की नियुक्ति पर एतराज, मौलाना रज़वी ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
महाराष्ट्र हज कमेटी, मुंबई में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पद पर एक हिंदू अधिकारी की नियुक्ति को लेकर आपत्ति उठाई गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने इस फैसले को ऐतिहासिक भूल बताते हुए महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं और इसे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ करार दिया है।
-रमेश कुमार सिंह-
बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने महाराष्ट्र हज कमेटी, मुंबई के सीईओ पद पर एक हिंदू अधिकारी की नियुक्ति पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि यह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में पहला मौका है, जब हज जैसी पवित्र इस्लामी धार्मिक संस्था की कमान किसी गैर-मुस्लिम अधिकारी को सौंपी गई है।
मौलाना रज़वी ने महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या पूरे राज्य प्रशासन में एक भी योग्य, अनुभवी और सक्षम मुस्लिम अधिकारी उपलब्ध नहीं था। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र कैडर सहित विभिन्न सरकारी विभागों में अनेक ऐसे मुस्लिम अधिकारी मौजूद हैं, जो प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ इस्लामी परंपराओं और हज की धार्मिक प्रक्रियाओं की बेहतर समझ रखते हैं।
उन्होंने इस नियुक्ति को मुस्लिम समुदाय के लिए शर्मनाक बताते हुए कहा कि इससे हज कमेटी की साख और छवि को गहरा नुकसान पहुंचेगा। मौलाना रज़वी के अनुसार, जिस अधिकारी को सीईओ नियुक्त किया गया है, उसका न तो इस्लाम से कोई संबंध है और न ही उसे हज की धार्मिक प्रक्रियाओं और अरकानों का आवश्यक ज्ञान है।
मौलाना ने आशंका जताई कि ऐसे में हज यात्रियों की व्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे हज पर जाने वाले जायरीनों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि हज केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि अत्यंत पवित्र धार्मिक यात्रा है, जिसकी व्यवस्थाओं में धार्मिक संवेदनशीलता और परंपराओं की गहरी समझ अनिवार्य है।
हज कमेटी के संचालन की गंभीरता का हवाला देते हुए मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने महाराष्ट्र सरकार से इस निर्णय को तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह मुस्लिम समुदाय की भावनाओं का सम्मान करे और हज जैसी धार्मिक संस्था के लिए ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति करे, जो इस्लामी परंपराओं, हज के अरकानों और समुदाय की आवश्यकताओं से भली-भांति परिचित हो।