सपा, कांग्रेस पर जमकर बरसीं मायावती, यूपी में अकेले चुनाव लड़ने का दिया संकेत

लखनऊ में कांशीराम पुण्यतिथि पर बुलाई गई रैली में मायावती ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी के एक अहम कदम का समर्थन किया। इस दौरान बसपा चीफ मायावती ने कांग्रेस सरकार और समाजवादी पार्टी की सरकार पर जमकर हमला बोला। इसके साथ ही पूर्व सीएम मायावती ने योगी सरकार की तारीफ की और उनका आभार भी जताया। लखनऊ में हुई बसपा की महारैली में मायावती ने यूपी के कोने-कोने से आए हुए पार्टी के सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद दिया।

Oct 9, 2025 - 18:54
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सपा, कांग्रेस पर जमकर बरसीं मायावती, यूपी में अकेले चुनाव लड़ने का दिया संकेत


लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक बार फिर बीएसपी की मुखिया मायावती के शक्ति प्रदर्शन की गवाह बनी। कांशीराम परिनिर्वाण दिवस पर कांशीराम स्मारक पार्क में बुलाई गई रैली में जबरदस्त भीड़ उमड़ी। केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, पड़ोस के कुछ अन्य राज्यों के बीएसपी समर्थक भी इस रैली में शामिल हुए। मंच से मायावती ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। वहीं, बीजेपी को लेकर एक बार फिर मायावती का नरम रुख दिखाई दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने एक फैसले पर पीएम नरेंद्र मोदी को अपना समर्थन भी दिया।

मायावती ने अपनी रैली में कहा, 'जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में कई महिलाओं के सिंदूर उजड़ गए, जो बेहद दुखद है। अगर वहां पहले से सुरक्षा के इंतजाम किए गए होते, तो इस हमले को रोका जा सकता था। इसके साथ ही हमारी विदेश नीति भी जनहित में होनी चाहिए। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने जो टैरिफ लगाया है, उससे भी केंद्र सरकार को सचेत रहने की जरूरत है। हाल ही में केंद्र सरकार ने स्वदेशी को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर होने की बात कही है, अगर ये फैसला हवा-हवाई साबित नहीं होता है, तो हमारी पार्टी केंद्र के इस फैसले का स्वागत करेगी।'  

लखनऊ रैली में मायावती ने यह भी कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में वह किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगी। 1993 और 1996 के चुनावों का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि जब-जब बीएसपी ने दूसरे दलों के साथ गठबंधन किया है, तो पार्टी की सीटें भी घटीं और वोट शेयर भी कम हुआ। मायावती ने कहा कि गठबंधन में बीएसपी का वोट तो दूसरे दलों को ट्रांसफर हो जाता है, लेकिन सवर्ण समाज का वोट उनकी पार्टी को नहीं मिलता। इसलिए, 2027 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी अकेले ही मैदान में उतरेंगी।

बसपा ने 2007 में इसी जगह महासंकल्प रैली कर समर्थकों को सत्ता हासिल करने का संदेश दिया था। इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 208 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। मायावती लंबे अंतराल के बाद 9 अक्टूबर की रैली में सार्वजनिक मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगी। ऐसे में कयास लगने लगे हैं कि क्या यह रैली बसपा की वापसी की शुरुआत होगी या एक औपचारिक शक्ति प्रदर्शन बनकर रह जाएगी?  

मायावती ने कहा कि आज मान्यवर कांशीराम की 19वीं पुण्यतिथि है और बहुजन समाज के जीवन के लिए कांशीराम का पूरा जीवन समर्पित था। मायावती ने कहा कि आप सभी ने भीड़ के मामले में अपना पिछला सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए लाखों-लाखों की संख्या में मान्यवर कांशीराम जी को श्रद्धासुमन अर्पित किया है। इस दौरान मायावती ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार के भी हम सभी आभारी हैं, इसलिए आभारी हैं क्योंकि वर्तमान बीजेपी सरकार ने कांशीराम जी के स्मारक से टिकट से इक्क्ठा हुए पैसे से इसके रखरखाव पर खर्च हुआ। इससे पिछली सपा सरकार ने पैसे को दबाकर रखा था कोई रखरखाव नहीं किया था।

इसके साथ ही मायावती ने कहा कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तब इसका पैसा दबाकर रखा था, अभी वह कह रहे हैं की सरकार में आने के बाद कांशीराम जी के नाम पर संगोष्ठी करेंगे। जब वह सरकार में रहते हैं तब ना उनको पीडीए याद रहता है और ना ही कांशीराम याद रहते हैं और सत्ता के बाद उनको पीडीए और कांशीराम याद हैं। समाजवादी पार्टी जैसे दोगले चरित्र वाले लोगों से आपको दूर रहना है। ये लोग आपको भ्रमित करने में लगे हुए हैं। समाजवादी पार्टी का पीडीए का नारा केवल खोखला है और ऐसे दोगलों से आप सभी को दूर रहना है।

बसपा चीफ ने कहा कि आप सभी को सत्ता की चाभी अपने हाथों में लेनी होगी तभी आपका जीवन स्वाभिमान के साथ व्यथित हो सकता है ऐसा बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था। आपको यूपी में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनानी होगी तभी आप सभी लोग अपना जीवन अच्छे से व्यतीत कर सकते हैं। हमने राज्य में तीन बार जोड़ तोड़ के सरकार बनाई लेकिन एक बार हमारी पार्टी ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई। समाजवादी पार्टी सरकार में केवल गुंडे, माफिया और अराजक तत्वों को ही बल मिलता था और वैसे ही कुछ स्तिथि हमें बीजेपी सरकार में भी दिख रही है और कांग्रेस सरकार में तो आप सभी का कोई महत्व ही नहीं था आप सभी का शोषण होता था।

कांग्रेस पार्टी के नेता संविधान को हाथ में लेकर तरह तरह के षड्यंत्र करते हैं। कांग्रेस पार्टी ने ही बाबासाहेब आंबेडकर को संसद में नहीं जाने दिया था और उनको भारत रत्न भी नहीं दिया था। कांग्रेस पार्टी ने कांशीराम के साथ भी ऐसा ही किया था। उनके निधन पर एक दिन का शोक भी नहीं रखा था। बसपा तेजी से आगे बढ़ रही थी लेकिन इन जातिवादी संकीर्ण सोच की पार्टियों ने हमें आगे बढ़ने नहीं दिया।

आजम खान के परिवार सेनहीं हुई कोई मुलाकात- मायावती
बसपा चीफ मायावती ने मंच से साफ इशारा कर दिया कि सपा नेता आजम खान के परिवार से उनकी कोई मुलाकात नहीं हुई है। मतलब यूपी की राजनीतिक चर्चाओं पर बसपा चीफ के इस बात के बाद विराम लगा दिया है कि आजम खान की बसपा में कोई बातचीत नहीं हुई है। हमारे आज के कार्यक्रम के घोषित होते ही अफवाह फैलाना शुरू कर दिया था कि दूसरी पार्टी के नेता आज हमारी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। मेरी मुलाकात की खबर भी झूठी चल रही थी, मैं किसी से चोरी छुपे नहीं मिलती हूं जिससे मिलती हूं सामने मिलती हूं।

अपना एक भी वोट खराब नहीं करना- मायावती
बसपा चीफ मायावती ने कहा कि बीएसपी को कमजोर करने के लिए विरोधी पार्टियों ने दलित समाज से स्वार्थी और बिकाऊ किस्म के लोगों को इस्तेमाल कर पार्टी और संगठन बना दिए हैं। ऐसे लोगों के चक्कर में पढ़कर अपना एक भी वोट खराब नहीं करना है।

आई लव विवाद पर भी मायावती की प्रतिक्रिया
पार्टी के लोगों को सचेत करने के लिए कहना चाहूंगी के दुनिया के कई देश किसी हिंसा में फंसे हैं, ऐसा माहौल देश में बनने से पहले केंद्र और राज्य सरकार ने उसे नियंत्रित किया है। एक दूसरे के देवी देवता और खुदा पर निकलने वाले नए-नए मुद्दों की आड़ में बवाल करने की कोशिश ओर देश का माहौल खराब करना देश हित में नहीं है। सबको एक दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए, आई लव आदि की राजनीति भी नहीं होनी चाहिए।

मायावती के नेतृत्व में पांचवी बार सरकार बनने जा रही है- आकाश आनंद
इस दौरान बसपा नेता और मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने कहा कि कांशीराम की 19वीं पुण्यतिथि है, उनकी एक मात्र उत्तराधिकारी बहन कुमारी मायावती का दिल से आदर सम्मान करता हूँ।  कांशीराम के अधूरे कारवें को आगे बढ़ाने काम मायावती कर रही है, इस भीड़ को देखकर लग रहा है कि मायावती के नेतृत्व में पांचवी बार सरकार बनने जा रही है. आने वाले समय के केंद्र और अन्य राज्यों की सत्ता में भी जरूर लाना है।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो 2027 का विस चुनाव भले सपा और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है, लेकिन बसपा सुप्रीमो मायावती की सक्रियता इसके बीच में एक मजबूत 'थर्ड फ्रंट' की जगह बना सकती है। ऐसे में गुरुवार की रैली के जरिए बसपा अपने 12-15 प्रतिशत कोर वोट शेयर को समेटने के साथ विधानसभा चुनाव में जुटने का संदेश देने का प्रयास करेगी। ऐसा करने के साथ अगर बसपा 2007 की सोशल इंजिनियरिंग दोहराने में सफल होती है तो वह न सिर्फ किंगमेकर बल्कि किंग की भूमिका में भी आ सकती है।