आगरा में हुई एक शादी के बाद पैदा हुआ मायावती का गुस्सा शांत ही नहीं हो रहा

लखनऊ। बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के लगातार गुस्से और पार्टी में चल रही सफाई की एक प्रमुख वजह आगरा में हुई एक शादी है। यह शादी बसपा से बाहर किये जा चुके अशोक सिद्धार्थ के बेटे की शादी थी। यह शादी पिछले वर्ष आगरा में संपन्न हुई थी, जिसमें दूल्हे की बरात आगरा में फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम मैरिज होम में पहुंची थी। वधु पक्ष फिरोजाबाद के एक वरिष्ठ बसपा नेता थे। इस शादी में पूरे यूपी से बड़ी संख्या में बसपा से जुड़े दिग्गज नेता शामिल हुए थे। खास बात यह रही कि खुद आकाश आनंद, जो कि अशोक सिद्धार्थ के दामाद और मायावती के भतीजे हैं, भी इस शादी में सम्मिलित हुए थे।

Jun 26, 2025 - 12:57
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आगरा में हुई एक शादी के बाद पैदा हुआ मायावती का गुस्सा शांत ही नहीं हो रहा

-समधी अशोक सिद्धार्थ के बेटे की शादी में जो-जो बसपा नेता पहुंचे थे, वे सब एक-एक कर पार्टी से बाहर हो रहे

सूत्रों के अनुसार, शादी में बसपा नेताओं की भीड़ जुटाई गई। बस यहीं से बसपा सुप्रीमो मायावती की भृकुटि तन गई। शायद इसे एक प्रकार से अशोक सिद्धार्थ के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया। बसपा सुप्रीमो को महसूस हुआ कि अशोक सिद्धार्थ, जो उनके समधी हैं, पार्टी के भीतर एक समानांतर शक्ति केंद्र खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। यही शक उनके गुस्से का कारण बन गया, जो अब तक शांत नहीं हुआ है।

इस शादी के बाद ही मायावती ने धीरे-धीरे उन सभी नेताओं को रडार पर लेना शुरू किया जो किसी न किसी रूप में अशोक सिद्धार्थ से जुड़े रहे या फिर उनके बेटे की शादी में शामिल हुए। इसका असर तब दिखा जब सबसे पहले फिरोजाबाद के वरिष्ठ नेता ज्ञान सिंह और आगरा के प्रभावशाली बसपा नेता गोरे लाल जाटव को पार्टी से बाहर किया गया। स्वयं अशोक सिद्धार्थ को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।

मायावती का गुस्सा यहीं नहीं रुका। उन्होंने अपने भतीजे और उत्तराधिकारी आकाश आनंद को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि, आकाश आनंद ने समय के साथ अपनी स्थिति फिर से मजबूत कर ली और मायावती का विश्वास जीतकर पार्टी में वापसी कर ली है। अब वे राष्ट्रीय स्तर पर बसपा के चीफ कोऑर्डिनेटर की भूमिका में हैं।

फिर भी, जो भी नेता अशोक सिद्धार्थ के साथ किसी भी रूप में संबंध रखते हैं, वे आज भी मायावती के निशाने पर बने हुए हैं। हाल ही में मिर्जापुर और प्रयागराज मंडल के कोऑर्डिनेटर्स को भी बाहर का रास्ता दिखाया गया है। मायावती फिलहाल पार्टी को पुराने स्वरूप में पुनः खड़ा करने के अभियान में जुटी हैं और लगातार मंडलवार बैठकों के माध्यम से नेताओं की नब्ज टटोल रही हैं। जैसे ही उन्हें किसी भी नेता के संबंध अशोक सिद्धार्थ से जुड़े होने का संकेत मिलता है, वह निर्णय लेने में देर नहीं करतीं।

SP_Singh AURGURU Editor