धोबी वाली बगीची के जमीन संबंधी में विवाद में मेयर ने दिया दखल, डीएम से मुलाकात कर की ठोस कार्रवाई की मांग
आगरा। बापू नगर, खंदारी स्थित दिवाकर समाज की धोबी वाली बगीची की जमीन का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। सोमवार शाम महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा ने इस प्रकरण को लेकर जिलाधिकारी, अरविंद मल्लपा बंगारी से मुलाकात की और दिवाकर समाज को न्याय दिलाने के लिए तत्काल व ठोस कार्रवाई करने की मांग की।
महापौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी कीमत पर दिवाकर समाज की जमीन पर किसी अन्य व्यक्ति या पक्ष का कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर हाईकोर्ट में अपील दायर कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत जमीन पर पुनः पूर्व की भांति नगर निगम का कब्जा सुनिश्चित कराया जाएगा।
न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर कब्जे की कोशिश
महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि विवादित जमीन पर लंबे समय से नगर निगम का कब्जा था और निगम द्वारा वहां निरंतर विकास कार्य कराए जा रहे थे। इसके बावजूद दायर किए गए सिविल वाद में नगर निगम को पक्षकार नहीं बनाया गया, जो सीधे तौर पर न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
उन्होंने कहा कि यह पूरी कोशिश योजनाबद्ध तरीके से जमीन हथियाने की है, जिसे प्रशासन और नगर निगम मिलकर विफल करेंगे।
महापौर ने इस संबंध में नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल को भी निर्देश दिए हैं कि मामले में सभी कानूनी पहलुओं की गहन समीक्षा कर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए और नगर निगम के हितों की मजबूती से पैरवी की जाए।
1981 से चला आ रहा है विवाद
गौरतलब है कि बापू नगर क्षेत्र में दिवाकर समाज की बगीची के सामने स्थित 809 वर्ग मीटर भूमि को लेकर वर्ष 1981 से लघुवाद न्यायालय में मुकदमा चल रहा था। वर्ष 2023 में न्यायालय ने वादी लोकेश गुप्ता आदि को कब्जा दिलाने का आदेश दिया था। आदेश के अनुपालन में पुलिस ने भूमि पर कब्जा भी दिला दिया। हालांकि, इसी भूमि पर डॉ. भीमराव आंबेडकर और महात्मा गांधी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। साथ ही दिवाकर समाज की बगीची के लिए 12 फीट चौड़ा और 76 फीट लंबा रास्ता छोड़ा गया था, जिसको लेकर समाज में भारी आक्रोश फैल गया है।
कब्जे की कार्रवाई के बाद दिवाकर समाज के लोग भी बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। सामाजिक भावनाओं से जुड़े इस मुद्दे के कारण प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर दबाव बढ़ा, जिसके बाद महापौर स्वयं सक्रिय भूमिका में सामने आईं।