कछुए की चाल में जीवन का संदेश: आगरा को बनाएं जैव विविधता का प्रहरी

क्या आपने कभी कछुए को ध्यान से देखा है? उसकी धीमी गति, सधी हुई चाल और संकट में खुद को समेट लेने की क्षमता हमें जीवन की स्थिरता और संतुलन का पाठ पढ़ाती है। कछुआ और खरगोश की कहानी भले ही बच्चों के लिए नैतिक शिक्षा का विषय हो, लेकिन आज के दौर में कछुआ हमारे पर्यावरण, संस्कृति और चेतना के केंद्र में आ गया है।

May 23, 2025 - 10:36
May 23, 2025 - 10:37
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कछुए की चाल में जीवन का संदेश: आगरा को बनाएं जैव विविधता का प्रहरी

पर्यावरण और जैव विविधता से जुड़ी चेतावनी

22 मई को जैव विविधता दिवस मनाया गया और आज 23 मई को विश्व कछुआ दिवस है। ये दोनों दिन हमें प्रकृति के साथ तालमेल बनाए रखने की सख्त जरूरत की ओर इशारा करते हैं। जिस तरह हम पेड़, पौधे, पानी और हवा को लेकर जागरूक होते हैं, उसी तरह हमें नदियों, झीलों और उनमें रहने वाले जीव-जंतुओं की सुरक्षा को लेकर भी सजग रहना चाहिए।

कछुआ: विलुप्ति के कगार पर

कछुए, जो कभी भारत की नदियों और झीलों में सहजता से पाए जाते थे, अब विलुप्ति और तस्करी के संकट का सामना कर रहे हैं। आगरा शहर इसका एक ज्वलंत उदाहरण है। एक समय था जब कमला नगर बनने से पहले गांधी आश्रम के पीछे बहने वाली यमुना नदी में मछलियों और कछुओं के साथ बच्चों की अठखेलियां आम दृश्य थीं। यमुना नदी में भी स्थानीय लोगों ने कभी जल जीवों की भरमार देखी थी। लेकिन आज, नदियां सूख रही हैं और कछुए जैसे महत्वपूर्ण जीव दुर्लभ हो गए हैं।

तस्करी: पर्यावरण पर हमला

कछुए की तस्करी केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पर्यावरण पर हमला है। कीठम झील में वन विभाग द्वारा छोड़े गए कछुओं को मैनपुरी तक तस्करों द्वारा ले जाया गया, जो कि एक बेहद गंभीर अपराध है। यह घटना आगरा जैसे संवेदनशील पर्यावरण क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण की स्थिति पर सवाल खड़े करती है।

आवश्यक पहल और सुझाव

अब समय आ गया है कि हम अपने स्थानीय जल स्रोतों, जैसे पालीवाल पार्क की झील, कीठम झील और चंबल घाटी को जल जीवों के सुरक्षित आवास में तब्दील करें। वन विभाग, नगर निगम और पर्यटन विभाग को मिलकर इन जल निकायों में कछुओं की संरक्षा, पुनरुत्पत्ति और जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए। पालीवाल पार्क जैसे स्थानों पर कछुओं की उपस्थिति न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी होगी, बल्कि पर्यटन और स्थानीय मनोरंजन के नए अवसर भी प्रदान करेगी।

धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता

भारतीय संस्कृति में भी कछुआ अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। फेंगशुई और ज्योतिष के अनुसार कछुए को धन, सुख और शांति का प्रतीक माना जाता है। घरों में कछुए की आकृति रखने से समृद्धि आती है। अतः इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को भी संरक्षण की चेतना से जोड़ा जाना चाहिए।

जन भागीदारी की आवश्यकता

किसी भी प्रयास को सफल बनाने के लिए जनभागीदारी ज़रूरी है। आम नागरिकों को भी चाहिए कि वे सतर्क रहें और वन्य जीवों की तस्करी या किसी भी प्रकार के शोषण की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाएं। कछुए जैसे जीवों की सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की नैतिक जिम्मेदारी भी है।

एक कदम बेहतर कल की ओर

आज जब कैलाश मंदिर कॉरिडोर और पर्यावरणीय विकास की बातें हो रही हैं, तो यह उम्मीद की जा सकती है कि जल, जीवन और जीवों के प्रति जागरूकता का नया युग प्रारंभ होगा। विश्व कछुआ दिवस पर हम सभी को शपथ लेनी चाहिए कि हम कछुओं को बचाएंगे, उन्हें पुनर्स्थापित करेंगे और उनके अस्तित्व को नई आशा देंगे।

आइए, आगरा को सिर्फ इतिहास और ताजमहल का शहर न बनाकर, एक हरित और जैव विविधता पूर्ण शहर बनाने की ओर कदम बढ़ाएं – जहां मनुष्य और जीव-जन्तु मिलकर जीवन का जश्न मना सकें।

-राजीव गुप्ता, जनस्नेही की कलम से, लोक स्वर आगरा।

SP_Singh AURGURU Editor