मध्य-पूर्व युद्ध की मार अब जूता उद्योग पर: कच्चे माल के दामों में बढोतरी से जूते की कीमतों में 20% उछाल, छोटे कारखाने बंद होने की कगार पर, शू फैक्टर्स फैडरेशन ने कहा- बड़े कारोबारी आपादा में अवसर न तलाशकर स्टॊक को पुराने रेट पर ही दें

मध्य-पूर्व (खाड़ी क्षेत्र) में जारी युद्ध का असर अब आगरा के जूता उद्योग पर साफ नजर आने लगा है। कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के चलते जूतों की कीमतों में 10 से 20 फीसदी तक इजाफा हो गया है, जिससे उद्योग में संकट गहराता जा रहा है और छोटे कारोबारियों पर सबसे ज्यादा मार पड़ रही है।

Mar 21, 2026 - 18:09
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मध्य-पूर्व युद्ध की मार अब जूता उद्योग पर: कच्चे माल के दामों में बढोतरी से जूते की कीमतों में 20% उछाल, छोटे कारखाने बंद होने की कगार पर, शू फैक्टर्स फैडरेशन ने कहा- बड़े कारोबारी आपादा में अवसर न तलाशकर स्टॊक को पुराने रेट पर ही दें
खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति के कारण जूता उद्योग पर आए संकट के बारे में बताते द आगरा शू फैक्टर्स फैडरेशन और भीम युवा व्यापार मण्डल के पदाधिकारी।

आगरा। आगरा का विश्वप्रसिद्ध जूता उद्योग इन दिनों वैश्विक संकट की चपेट में है। खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा असर जूता निर्माण में प्रयोग होने वाले कच्चे माल पर पड़ा है। जूते में इस्तेमाल होने वाले करीब 34 प्रकार के कच्चे माल में से 32 सीधे तौर पर क्रूड ऑयल से जुड़े हैं, जिसके चलते उनकी कीमतों में तेज उछाल आया है।

इस गंभीर स्थिति को लेकर द आगरा शू फैक्टर्स फैडरेशन और भीम युवा व्यापार मण्डल के संयुक्त तत्वावधान में फैडरेशन कार्यालय पर एक अहम बैठक हुई। इसके बाद प्रेस वार्ता कर संकट के बारे में बताया गया। बैठक में उद्योग से जुड़े व्यापारियों और पदाधिकारियों ने बढ़ती कीमतों, कालाबाजारी और उत्पादन पर पड़ रहे असर को लेकर विस्तार से चर्चा की और समाधान तलाशने पर जोर दिया।

फैडरेशन के अध्यक्ष विजय सामा ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के चलते देश में महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण बना हुआ है, लेकिन क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों ने जूता उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने बताया कि कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि से जूतों की लागत बढ़ रही है, जिससे बाजार में कीमतें भी बढ़ रही हैं। उदाहरण के तौर पर 250 रुपये का जूता अब 290 रुपये तक पहुंच गया है।

उन्होंने बड़े कारोबारियों से अपील की कि इस संकट की घड़ी में आपदा में अवसर न तलाशें और पुराने स्टॉक को पुरानी कीमतों पर ही उपलब्ध कराएं, ताकि छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

भीम युवा व्यापार मण्डल के अध्यक्ष प्रदीप कुमार पिप्पल ने कहा कि वैश्विक संकट के इस दौर में सभी व्यापारी एकजुट होकर काम करेंगे और मिलकर जूतों की कीमतों को संतुलित रखने का प्रयास करेंगे।

बैठक में संजय मगन, प्रमोद महाजन, हरीश वंजानी, अजय महाजन, अजय गोवर्धन सुनेजा, धनश्याम लालवानी, दिलप्रीत सचदेवा, सतीश सागर, शेखर पिप्पल, अतुल कर्दम, अजयपाल सिंह, रूपेश छागला, रोबिन मोर्य, जितेश सिंह और सुरेन्द्र पिप्पल सहित कई प्रमुख व्यापारी मौजूद रहे।

कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी

पॉलीथिन: 140 रुपये/किलो से बढ़कर 210 रुपये/किलो। कुशन फोम: 300 रुपये/किलो से बढ़कर 400 रुपये/किलो, ईवा शीट: 50 रुपये/पीस से बढ़कर 55 रुपये/पीस, पीवीसी फोम: 250 रुपये से बढ़कर 300 रुपये, एयरमिक सोल: 70 रुपये/जोड़ी से बढ़कर 75 रुपये, पीयू सोल: 100 रुपये/जोड़ी से बढ़कर 110 रुपये, टीपीआर सोल: 100 रुपये/जोड़ी से बढ़कर 110 रुपये और पीयू अडहेसिव: करीब 10% की बढ़ोतरी हो गई है।

एलपीजी की किल्लत के चलते ढलाई और डाई का काम भी प्रभावित हो रहा है, जिससे कई छोटी फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप होने की स्थिति बन गई है।

बैठक में कहा गया कि यदि जल्द ही इस संकट का समाधान नहीं निकला, तो इसका सीधा असर न सिर्फ उद्योग बल्कि आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ेगा।

SP_Singh AURGURU Editor