महिला आयोग अध्यक्ष का आधी रात का एक्शन: थानेदार को तलब कर बालिका का बयान व मेडिकल कराया
आगरा। पीड़ित बालिका की सिसकियां और पिता की आंसुओं भरी फरियाद सुनते ही उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने समय नहीं देखा। आधी रात होने को थी। उसी समय थानाध्यक्ष को अपने आवास पर तलब कर लिया। इसके बाद मिनटों में पीड़िता के बयान दर्ज हुए और उसके बाद रात में ही मेडिकल भी हो गया। रात 2 बजे तक बालिका और उसके परिवार को इंसाफ और सुरक्षा का कवच मिल गया था।
मामला इरादतनगर थाना क्षेत्र का है और आठ दिन पुराना है। इस थाना क्षेत्र के एक गांव से आए गरीब परिवार ने विगत 2 अगस्त की शाम उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान के प्रोफेसर कॉलोनी स्थित आवास पर अपनी फरियाद लेकर दस्तक दी। परिवार में किशोरी, उसके माता-पिता शामिल थे। आयोग अध्यक्ष उस समय दौरे पर थीं, इसलिए परिवार घर के बाहर ही बैठकर इंतज़ार करने लगा।
लौटते ही सुनी पीड़ा, थानेदार को तुरंत बुलाया
रात करीब साढ़े दस बजे डॉ. बबीता सिंह चौहान घर लौटीं तो किशोरी के पिता ने रोते हुए आपबीती सुनाई। उनका आरोप था कि किशोरी के चाचा ने ही उसके साथ बलात्कार किया है, लेकिन इरादतनगर पुलिस सुनवाई नहीं कर रही। यह सुनते ही डॉ. चौहान तमतमा उठीं। उन्होंने तुरंत थानाध्यक्ष इरादतनगर को फोन लगाया और तत्काल अपने आवास पर पहुंचने को कहा।
थानेदार की टालमटोल पर भड़कीं
पहले तो थानेदार ने पीड़ित परिवार को थाने भेजने की बात कही, लेकिन डॉ. बबीता चौहान ने साफ कह दिया- इसी वक्त मेरे सामने हाज़िर हों। उनके कड़े रुख को देखते हुए थानाध्यक्ष रात साढ़े ग्यारह बजे दौड़ते हुए आयोग अध्यक्ष के आवास पहुंच गए।
मौके पर ही बयान और उसी रात हुआ मेडिकल
डॉ. बबीता चौहान ने थानेदार को पहले फटकार लगाई, फिर अपने सामने ही किशोरी के बयान दर्ज कराए। इसके बाद उन्होंने आधी रात में सीएमओ को फोन कर तत्काल बालिका का मेडिकल कराने का निर्देश दिया। सीएमओ के आदेश पर थानेदार बालिका को मेडिकल के लिए ले गए।
आधी रात में इंसाफ और सुरक्षा का भरोसा
मेडिकल पूरा होने के बाद डॉ. चौहान ने थानाध्यक्ष को निर्देश दिया कि परिवार को अपनी गाड़ी से घर तक सुरक्षित पहुंचाएं और सुनिश्चित करें कि गांव में उनका कोई नुकसान न हो। पूरी प्रक्रिया रात 2 बजे तक चली, तब जाकर आयोग अध्यक्ष विश्राम के लिए गईं।