एक घंटे इंतजार के बाद भी अफसरों के न आने पर भड़कीं मंत्री बेबीरानी, किसानों ने की नारेबाजी
आगरा। उत्तर प्रदेश की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री बेबीरानी मौर्य आज उस समय भड़क उठीं जब उनके द्वारा बुलाई गई बैठक में अधिकारी नहीं पहुंचे। मंत्री ने एक घंटे तक इंतजार भी किया, लेकिन जब कोई अधिकारी नहीं आया हो वे बैठक स्थल से चली गईं। उन्होंने इस बारे में मुख्यमंत्री से शिकायत करने की बात कही है। अधिकारियों के इस रवैये को लेकर बैठक के लिए पहुंचे किसान भी भड़क उठे और उन्होंने विकास भवन पर जमकर प्रसासन के खिलाफ नारेबाजी की।
-किसानों की समस्याओं पर सीडीओ ऒफिस में बुला रखी थी मीटिंग, बोलीं- आगरा के अधिकारी किसानों को लेकर गंभीर नहीं, सीएम से शिकायत करेंगी
सीडीओ ऒफिस में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के नियुक्ति पत्र बांटे गये थे। इस कार्यक्रम में महिला एवं बाल कल्याण मंत्री बेबीरानी मौर्य, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और एमएलसी विजय शिवहरे पहुंचे हुए थे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। नियुक्ति पत्रों का मंत्री और विधायकों ने वितरण किया।
इसी कार्यक्रम के बाद कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य ने किसानों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों की बैठक भी बुला रखी थी। स्वास्थ्य विभाग के नियुक्ति पत्रों के वितरण के बाद बेबीरानी मौर्य ने किसानों के मुद्दों पर बैठक करनी चाही। इसके लिए किसान नेता श्याम सिंह चाहर तथा कुछ किसान भी समय पर सीडीओ ऒफिस पहुंच गये थे। इन्हीं किसानों को बैठाकर अधिकारियों से उनकी समस्या का निराकरण कराने के लिए मंत्री ने बैठक बुलाई थी। निर्धारित समय गुजर जाने के बाद भी अधिकारी बैठक के लिए नहीं पहुंचे तो मंत्री बेबीरानी ने पहले तो इंतजार किया, लेकिन एक घंटा गुजर जाने के बाद भी कोई अधिकारी नहीं आया तो उन्हें गुस्सा आ गया।
मंत्री बेबीरानी ने बैठक स्थल को छोड़ दिया और अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर बताएंगी कि आगरा के अधिकारी किसानों की समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर बेहद संवेदनशील है, लेकिन आगरा के अधिकारी किसानों को लेकर कतई गंभीर नहीं हैं।
यह भी पता चला है कि मुख्यमंत्री के सलाहकार वी. राजू आज आगरा में बैठक करने आए हुए हैं। डीएम समेत सभी वरिष्ठ अधिकारी उसी बैठक में थे। माना जा रहा है कि इसी वजह से मंत्री बेबीरानी मौर्य की बैठक में कोई अधिकारी नहीं आ सका। हालांकि यह कोई वजह नहीं हो सकती क्योंकि अगर डीएम किसी दूसरी बैठक में मौजूद थे तो प्रशासन का एडीएम स्तर का कोई अधिकारी भी मंत्री की बैठक में पहुंच सकता था। साथ ही उन विभागों के अधिकारी भी आ सकते थे, जिनसे संबंधित किसानों की समस्याएं थीं। ऐसा लगता है कि आगरा के अधिकारी मंत्री द्वारा बुलाई गई बैठक को भूल ही गये।