वृंदावन में बोले मोहन भागवत- समय आ गया है कि भारत दुनिया को सुख, शांति और संतुलन का मार्ग दिखाए
वृंदावन। संत मलूकदास की 452वीं जयंती के अवसर पर पानीघाट स्थित श्री पहाड़ी बाबा भक्तमाली गौशाला में आयोजित भव्य कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत के वैश्विक भविष्य को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा- भारत अवश्य विश्व गुरु बनेगा और यह संतों द्वारा दिखाई गई राह पर चलकर ही संभव होगा।
संतों की प्रेरणा से बदलेगा विश्व का भविष्य
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत अपनी आध्यात्मिक परंपरा और संतों के आदर्शों के आधार पर विश्व को नई दिशा देने में सक्षम है। उन्होंने पश्चिम एशिया में बढ़ती अशांति का जिक्र करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि भारत दुनिया को सुख, शांति और संतुलन का मार्ग दिखाए।
उन्होंने कहा कि संतत्व, अध्यात्म और नैतिक मूल्यों के सहारे ही भारत विश्व गुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा और संघ इस कार्य में संतों के साथ मिलकर प्रयास करेगा।
सत्य और करुणा के बिना धर्म अधूरा
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत की परंपरा सत्य और करुणा पर आधारित है और इन्हीं मूल्यों पर जीवन को स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संतों के सानिध्य में रहकर उनके शब्दों के साथ-साथ उनके भाव को भी समझना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि 142 करोड़ लोगों का संत बनना संभव नहीं, लेकिन सभी का जीवन शुद्ध, अनुशासित और सुचिता पूर्ण होना चाहिए, यही राष्ट्र निर्माण का आधार बनेगा।
गौहत्या पर बड़ा बयान: समाज को गोभक्त बनाओ
महंत राजेंद्र दास महाराज द्वारा गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट कहा कि समाज को पहले गोभक्त बनाना होगा, तभी गौहत्या अपने आप रुक जाएगी।
उन्होंने कहा कि जब समाज में इस विषय पर व्यापक जनभावना खड़ी होगी, तो सरकार को भी उसे स्वीकार करना पड़ेगा।
उन्होंने श्रीराम मंदिर आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह देशभर में भावना जागी, उसी तरह गाय के संरक्षण के लिए भी जनजागरण आवश्यक है। संघ इस दिशा में व्यापक अभियान चलाएगा।
मलूक पीठ: 452 वर्षों से जीवंत संत परंपरा
श्री भागवत ने कहा कि मलूक पीठ 452 वर्षों से संत मलूकदास की परंपरा को जीवंत बनाए हुए है, जो समाज को जीवन दर्शन और आध्यात्मिक मार्गदर्शन देती है।
उन्होंने संतों की इस परंपरा से प्रेरणा लेकर समाज में एकता, करुणा और सहअस्तित्व को मजबूत करने का आह्वान किया।
पूजन-अर्चना और गौसेवा से कार्यक्रम का आध्यात्मिक उत्कर्ष
कार्यक्रम से पूर्व मोहन भागवत ने वंशीवट स्थित मलूक पीठ में संत मलूकदास महाराज की समाधि पर पूजा-अर्चना की और गौशाला में गौपूजन कर राष्ट्र कल्याण की कामना की।
इस अवसर पर मलूक पीठाधीश्वर डॉ. राजेंद्र दास महाराज, योग गुरु बाबा रामदेव, गोरेलाल महाराज, बाबा बलराम दास, लाडली शरण महाराज, फूलडोल महाराज, धीर समीर वाले महाराज, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद सहित अनेक संत और श्रद्धालु उपस्थित रहे।