वृक्षारोपण की निगरानी जियो टैगिंग से, पौधों को जीवित बनाए रखने पर सरकार का विशेष फोकस

नई दिल्ली। राज्यसभा में सांसद नवीन जैन द्वारा पूछे गये एक सवाल के जवाब में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार वृक्षारोपण और वृक्ष संरक्षण को केवल औपचारिकता नहीं मानती, बल्कि पौधों की जीवित रहने की दर, जिओ टैगिंग और प्रतिपूरक वनीकरण जैसी पारदर्शी प्रणालियों के माध्यम से दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित कर रही है।

Aug 6, 2025 - 18:56
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वृक्षारोपण की निगरानी जियो टैगिंग से, पौधों को जीवित बनाए रखने पर सरकार का विशेष फोकस

-सांसद नवीन जैन के सवाल के जवाब में मंत्री का जवाब- एक पेड़ मां के नाम जैसी पहलों से बढ़ाया पर्यावरणीय जुड़ाव 

मंत्री ने बताया कि सरकार हरित भारत के निर्माण में समाज की व्यापक भागीदारी को जरूरी मानती है और एक पेड़ मां के नाम जैसे अभियानों को जागरूकता बढ़ाने वाला ठोस कदम मानती है।

राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने सरकार से यह जानकारी मांगी थी कि वृक्षों के संरक्षण, वृक्षारोपण की निगरानी और भवन निर्माण में कटे वृक्षों की भरपाई को लेकर क्या योजनाएं और नियम प्रभावी हैं।

मंत्री ने बताया कि वर्तमान में देशभर में वनीकरण हेतु विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें प्रमुख हैं- राष्ट्रीय हरित भारत मिशन, नगर वन योजना, मैंग्रोव पहल, प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण, राज्य वित्तपोषित विशेष पहलें और वृक्षों की सुरक्षा और पौधों की निगरानी।

मंत्री ने जानकारी दी कि वृक्षारोपण अभियानों की निगरानी के लिए जिओ टैगिंग और फोटोग्राफी डॊक्यूमेंटेशन और स्थलीय निरीक्षण जैसे तकनीकी उपाय अपनाए जा रहे हैं। केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, उनकी जीवितता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

2020 से अब तक दो करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में हुआ वृक्षारोपण

राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच देशभर में 2,00,80,595 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण किया गया है।
उत्तर प्रदेश ने इसमें सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जहां 23,49,729 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण हुआ। इसके बाद तेलंगाना (15,50,871 हेक्टेयर) और गुजरात (11,38,066 हेक्टेयर) जैसे राज्य अग्रणी रहे।

पर्यावरणीय स्वीकृति में शामिल है वृक्ष प्रतिपूर्ति की शर्त

मंत्री ने सांसद जैन के सवाल के जवाब में बताया कि भवन निर्माण परियोजनाओं में वृक्षों की कटाई होने पर उसे लेकर स्पष्ट नीति है। ईआईए नोटिफिकेशन 2006 के तहत, परियोजनाओं को पर्यावरणीय स्वीकृति तभी मिलती है जब वे वृक्षों की प्रतिपूर्ति, हरित पट्टी विकास, जैव विविधता संरक्षण, और स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण जैसे प्रावधानों का अनुपालन करती हैं।

SP_Singh AURGURU Editor