कंपनियों में जितनी दवा बनी भी नहीं, उससे ज्यादा आगरा में मिल चुकीं, तीन और बंदी, कई शहरों में लिंक मिले
आगरा। आगरा में नकली दवाओं का कारोबार अब सीमाओं से बाहर निकलकर देशभर में फैले संगठित गैंग का रूप लेता दिख रहा है। जांच एजेंसियों ने अलीगढ़, मुजफ्फरनगर, बरेली, लखनऊ और कानपुर तक इसके लिंक उजागर किए हैं। सबसे बड़ा खुलासा पुडुचेरी के कुख्यात दवा माफिया राजा सिंह का नाम है, जिसे इस गिरोह का प्रमुख खिलाड़ी माना जा रहा है। राजा सिंह फिलहाल फरार है, लेकिन उसकी गिरफ्तारी के लिए तलाश तेज हो गई है।
-अब तक चार मुकदमे दर्ज, बंसल मेडिकल स्टोर के संजय, मुकेश और रोहित भी गिरफ्तार किए गए
-आगरा के नकली दवा माफिया का देशव्यापी जाल, पुडुचेरी का कुख्यात राजा सिंह भी जांच के घेरे में
- विशेष सचिव रेखा एस चौहान बोलीं- छापे के समय दुकानें बंद करने वालों की भी जांच होगी
-ड्रग विभाग के अंदरूनी सहयोगियों को भी चिन्हित करने का काम किया जा रहा- विशेष सचिव
ऑर्गेनाइज्ड गैंग की तरह काम कर रहा नेटवर्क
नकली दवाओं को लेकर चल रही छापेमारी की जानकारी लेने आगरा पहुंचीं विशेष सचिव रेखा एस. चौहान ने मंडलायुक्त सभागार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आगरा में नकली दवाओं का कारोबार ऑर्गेनाइज्ड गैंग की तरह काम कर रहा था। केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि कई राज्यों तक फैले इस नेटवर्क के जरिए नकली दवाओं की सप्लाई होती रही। अब तक चार गिरफ्तारियां और चार मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि ड्रग विभाग और एसटीएफ द्वारा की जा रही जांच के तहत हे मां मेडिकल स्टोर के हिमांशु अग्रवाल को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। अब बंसल मेडिकल स्टोर के संचालक संजय बंसल व मुकेश बंसल और इनके भतीजे सोहित बंसल को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। इनके गोदामों की पिछले तीन दिनों से जांच चल रही थी। इनके खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
माइक्रो लेवल जांच, कंपनियों से फीडबैक
विशेष सचिव ने बताया कि जांच के लिए कंपनियों से माइक्रो लेवल पर डिटेल ली जा रही है। कई दवा कंपनियों ने साफ किया है कि जिन बैच नंबर की दवाएं बाजार में मिलीं, उतना प्रोडक्शन कभी किया ही नहीं गया। यानी 100 डिब्बों का बिल दिखाकर 1000 डिब्बे बाजार में खपाए गए। नकली दवाओं को असली की तरह पेश करने के लिए एक ही बैच नंबर का बार-बार इस्तेमाल हुआ।
दुकानदारों और संरक्षणदाताओं पर शिकंजा
विशेष सचिव ने बताया छापेमारी के दौरान जिन दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दी थीं, उनकी भी जांच की जाएगी। यह पता लगाया जा रहा है कि दवा माफिया को किसका संरक्षण प्राप्त है। परिवारजनों के नाम पर खोली गई फर्मों की भी जांच होगी। ड्रग विभाग के अंदरूनी सहयोगियों को भी चिन्हित करने का काम शुरू हो चुका है।
जनता को जागरूक करने की तैयारी
विशेष सचिव रेखा एस. चौहान ने कहा कि नकली और असली दवा पहचानने के लिए जनता को जागरूक किया जाएगा। जिन कंपनियों की असली और नकली दोनों दवाएं बाजार में मिली हैं, उनसे बैच नंबर की पूरी डिटेल मांगी गई है ताकि नकली दवाओं को चिन्हित कर सील किया जा सके। इसके लिए एक क्यूआर कोड भी तैयार किया गया है।
करोड़ों का माल जब्त, जांच का दायरा बढ़ा
जांच में पता चला है कि आगरा के हे मां मेडिकल के गोदाम में अकेले 60 करोड़ का माल मौजूद था। फिलहाल साढ़े पांच करोड़ रुपए की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। सभी सैंपलों की जांच लखनऊ की लैब में कराई जा रही है और शासन खुद हर रिपोर्ट पर नजर रख रहा है।
चेन्नई और पुडुचेरी तक पहुंची जांच
विशेष सचिव ने बताया कि टीमें चेन्नई और पुडुचेरी तक भेजी जाएंगी। फरार माफिया राजा सिंह की गिरफ्तारी इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि कार्रवाई अब रुकने वाली नहीं है और विभाग को अपने काम करने का तरीका पूरी तरह बदलना होगा।