सांसद चाहर ने लोकसभा में एक बार फिर उठाया टीटीजेड का मुद्दा, आगरा को आईटी हब बनाने की मांग
आगरा। ताजमहल की सुरक्षा के नाम पर लगाए गए पर्यावरणीय प्रतिबंधों से आगरा और आसपास के जिलों में औद्योगिक विकास तथा रोजगार पर गहरा असर पड़ रहा है। इसी गंभीर समस्या को एक बार फिर फतेहपुर सीकरी के सांसद राज कुमार चाहर ने लोकसभा में नियम 177 के तहत उठाते हुए आगरा को देश का प्रमुख आईटी केंद्र घोषित करने की मांग की, ताकि युवाओं को रोजगार और क्षेत्र को विकास की नई दिशा मिल सके।
लोकसभा में नियम 177 के तहत बोलते हुए सांसद राज कुमार चाहर ने कहा कि आगरा, फिरोज़ाबाद, हाथरस, मथुरा और राजस्थान के भरतपुर जैसे जिले ताजमहल की ऐतिहासिक एवं अद्वितीय विरासत की सुरक्षा के लिए ताज ट्रेपेजियम ज़ोन (टीटीजेड) और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के कड़े पर्यावरणीय प्रतिबंधों के दायरे में आते हैं। इन प्रतिबंधों के चलते इन क्षेत्रों में बड़े और भारी उद्योग स्थापित नहीं हो पाते, जिससे हजारों युवाओं को सीमित रोजगार अवसर मिलते हैं। लगातार बढ़ती बेरोजगारी के कारण क्षेत्र का युवा अन्य शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर है।
उन्होंने कहा कि आगरा देश के सबसे महत्वपूर्ण नगरों में है और दिल्ली के नजदीक स्थित होने के कारण रणनीतिक, औद्योगिक और वाणिज्यिक संभावनाओं से भरपूर है, लेकिन पर्यावरणीय रोकों के कारण इसकी विकास क्षमता बाधित हो रही है।
सांसद ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि आगरा को देश का प्रमुख आईटी हब घोषित किया जाए। उनके अनुसार आगरा को आईटी सेक्टर में विकसित करने से न केवल स्थानीय युवाओं को बड़े स्तर पर रोजगार मिलेगा, बल्कि आगरा और आसपास के जिलों की आर्थिक प्रगति के नए रास्ते भी खुलेंगे।
सांसद चाहर ने कहा कि यदि भारी उद्योग टीटीजेड प्रतिबंधों के कारण संभव नहीं हैं, तो आईटी सेक्टर आगरा के लिए सबसे उपयुक्त और सुरक्षित विकल्प हो सकता है। इससे बिना प्रदूषण के तेजी से रोजगार और निवेश बढ़ेगा तथा युवाओं का पलायन भी रुकेगा।