सांसद चाहर ने उठाया बड़ा मुद्दा- अटलपुरम और ग्रेटर आगरा टाउनशिप से एडीए हजारों करोड़ कमाएगा तो किसानों को भी लाभांश के रूप में छह प्रतिशत विकसित भूखंड दिया जाए, गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॊरिटी में लागू है यह व्यवस्था, मंडलायुक्त से कहा- एडीए बोर्ड की बैठक बुलाकर आगरा में भी इसे लागू करें

आगरा। भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फतेहपुर सीकरी के सांसद राज कुमार चाहर ने किसानों से जुड़ा एक ऐसा मुद्दा उठाया है, जो जहां आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की पेशानी पर बल लाएगा, वहीं किसानों की बांछें खिलाने वाला है। सांसद चाहर ने आगरा के मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप से मुलाकात कर उन्हें एक मांग पत्र सौंपा और यह मांग उठाई कि एडीए द्वारा विकसित की जा रही अटलपुरम् और ग्रेटर आगरा टाउनशिप में प्रभावित किसानों को मुआवजे के अलावा लाभांश भी दे। यह लाभांश विकसित भूमि का छह से सात प्रतिशत भूखंड होना चाहिए। सांसद ने तर्क दिया है जब एडीए टाउनशिप प्रोजेक्ट्स से हजारों करोड़ की कमाई करने जा रहा है, तो किसानों को भी मुआवजे के अतिरिक्त विकसित भूमि का 6-7 प्रतिशत हिस्सा मिलना चाहिए।

Apr 6, 2026 - 21:46
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सांसद चाहर ने उठाया बड़ा मुद्दा- अटलपुरम और ग्रेटर आगरा टाउनशिप से एडीए हजारों करोड़ कमाएगा तो किसानों को भी लाभांश के रूप में छह प्रतिशत विकसित भूखंड दिया जाए, गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॊरिटी में लागू है यह व्यवस्था, मंडलायुक्त से कहा- एडीए बोर्ड की बैठक बुलाकर आगरा में भी इसे लागू करें
किसानों के जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप से बात करते सांसद राज कुमार चाहर।

सांसद चाहर ने बताया कि आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा ग्वालियर रोड स्थित ककुआ-भांडई क्षेत्र में करीब 340 एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहीत कर ‘अटलपुरम’ नाम से टाउनशिप विकसित की जा रही है। यहां आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों की बिक्री लगभग 30,000 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से हो रही है। किसानों को दी गई जमीन का मुआवजा और विकास कार्यों की लागत मिलाकर पूरे प्रोजेक्ट कुल खर्च करीब 738 करोड़ रुपये है, वहीं इस प्रोजेक्ट से एडीए को लगभग 1527 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है, जो कुल खर्च से लगभग दोगुना है।

भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मंडलायुक्त से कहा कि इसी प्रकार ग्रेटर आगरा परियोजना के अंतर्गत रहनकलां और रायपुर क्षेत्र में वर्ष 2012 में अधिग्रहीत जमीन के बदले किसानों को औसतन 1600 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा दिया गया है, जो सर्किल रेट के अनुसार लगभग 1 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर बैठता है। अब उसी भूमि पर एडीए 32-33 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से प्लॉट बेचने की तैयारी में है, जबकि विकास की कुल लागत महज 4500 प्रति वर्गमीटर आने का अनुमान है। भविष्य में यह दर 60 से 70 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर तक पहुंचने की संभावना है।

सांसद राज कुमार चाहर ने कहा कि इन परियोजनाओं से एडीए को करीब 5000 करोड़ का मुनाफा होने का अनुमान है। ऐसे में यह न्यायसंगत नहीं कि किसानों को केवल एकमुश्त मुआवजा देकर छोड़ दिया जाए।

उन्होंने मंडलायुक्त को यह भी बताया कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के प्राधिकरणों द्वारा अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे के अलावा अधिग्रहीत भूमि का छह प्रतिशत विकसित भूखंड किसानों को दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यूपी के ये तीनों प्राधिकरण किसानों को छह प्रतिशत भूमि वापस लौटा सकते हैं तो आगरा विकास प्राधिकरण में क्यों नहीं ऐसा हो सकता। उन्होंने मांग की कि आगरा में भी किसानों को विकसित भूमि का कम से कम 6-7 प्रतिशत हिस्सा निःशुल्क दिया जाए। इन प्राधिकरणों में किसानों को मुआवजे के साथ प्लॉट के रूप में जमीन देने की व्यवस्था पहले से लागू होने के नियम से उनका भविष्य सुरक्षित हुआ है।

मांग पत्र में यह भी कहा गया कि जिन किसानों की भूमि अधिग्रहीत की गई है, उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी दी जाए। सांसद ने जोर देकर कहा कि चूंकि यह भूमि सार्वजनिक उपयोग (जैसे अस्पताल या रेलवे) के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक लाभ के लिए अधिग्रहीत की गई है, इसलिए किसानों को भी इस लाभ में भागीदार बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने विकास प्राधिकरण बोर्ड की बैठक बुलाकर किसानों के हित में जल्द निर्णय लेने की मांग की है।

SP_Singh AURGURU Editor