दलित युवती के गंभीर आरोपों से ‘सिर मुंडाते ही ओले पड़े' जैसी हालत में सांसद चंद्रशेखर

लखनऊ। आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष व नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद इन दिनों राजनीतिक नहीं, व्यक्तिगत संकट के घेरे में आ गए हैं। मध्य प्रदेश की एक दलित युवती रोहिणी घावरी के गंभीर आरोपों ने उनकी निजी छवि और राजनीतिक विश्वसनीयता दोनों पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

Jun 24, 2025 - 12:47
Jun 24, 2025 - 12:49
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दलित युवती के गंभीर आरोपों से ‘सिर मुंडाते ही ओले पड़े' जैसी हालत में सांसद चंद्रशेखर

कौन हैं रोहिणी घावरी?

स्विट्ज़रलैंड में पीएचडी कर रहीं रोहिणी घावरी, वाल्मीकि समुदाय से हैं और उनकी मां सफाई कर्मचारी हैं।  वे मध्य प्रदेश सरकार से मिली एक करोड़ रुपये की स्कॊलरशिप पर स्विटरलैंड में पीएचडी कर रही हैं। रोहिणी का कहना है कि उन्होंने चंद्रशेखर को दलित अधिकारों के संघर्ष करते देखा और उनके संपर्क में आईं। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और रिश्ता एक 'डीप रिलेशनशिप' में तब्दील हो गया।

 मुझसे शादीशुदा होने की बात छुपाई-रोहिणी

रोहिणी का आरोप है कि चंद्रशेखर ने उन्हें यह कहकर अपने करीब आने दिया कि वह अविवाहित हैं। लेकिन जब वे इस रिश्ते में बहुत आगे बढ़ चुकी थीं, तब उन्हें पता चला कि चंद्रशेखर पहले से शादीशुदा हैं। जब उन्होंने सवाल उठाया तो उन्हें मामले को तूल न देने की सलाह दी गई।

इस धोखे के बाद रोहिणी अवसाद में चली गईं, लेकिन अब उन्होंने खुद को संभाला है और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रही हैं। उनका दावा है कि चंद्रशेखर ने सिर्फ उनके साथ ही नहीं, बल्कि दो अन्य युवतियों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया है।

चंद्रशेखर के नो कमेंट से बड़ा बनता मुद्दा

पूरे घटनाक्रम में सांसद चंद्रशेखर आज़ाद खामोश हैं। एक-दो बार पत्रकारों ने सवाल किए तो उन्होंने केवल इतना कहा कि इस पर उन्हें कुछ नहीं कहना। लेकिन 'नो कमेंट' भी एक बड़ा कमेंट बन चुका है, खासकर तब, जब यह मसला उनके राजनीतिक भविष्य से सीधे जुड़ता हो।

राजनीति में मिशन 2027 को लगेगा झटका?

चंद्रशेखर आज़ाद लंबे समय से बसपा के विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश में लगे हैं। वह दलित युवाओं के लिए एक नए नेता के रूप में अपनी छवि गढ़ रहे हैं। 2027 में यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर वे पूरी रणनीति बना चुके हैं। खासकर पश्चिम यूपी में वे अपना जनाधार मज़बूत करने में जुटे हुए थे।

लेकिन घावरी के खुलासे ने उनकी विश्वसनीयता और नैतिक छवि पर सीधा प्रहार किया है। दलित महिला होने के कारण रोहिणी की बात को खारिज करना आसान नहीं होगा। वो भी तब जब उनका बैकग्राउंड स्वच्छ, शैक्षणिक और संघर्षशील नजर आता है।

कोई संकट मान रहा तो कोई कह रहा राजनीतिक साजिश

राजनीतिक गलियारों में इस विवाद को लेकर दो धाराएं बन गई हैं। एक वर्ग इसे निजी आचरण से जुड़ा गहरा संकट मान रहा है जो जनता के भरोसे को तोड़ सकता है। वहीं कुछ समर्थकों का कहना है कि यह चंद्रशेखर के उभार को रोकने की सुनियोजित साजिश है। बहरहाल, घावरी ने खुलकर बोलना शुरू कर दिया है और चंद्रशेखर खामोश हैं, यही असंतुलन अब राजनीतिक नुकसान की वजह बन सकता है।

कानूनी कार्रवाई हुई तो गंभीर मोड़ लेगा मामला

रोहिणी यदि कानूनी कार्रवाई करती हैं, तो मामला गंभीर मोड़ ले सकता है। चंद्रशेखर की राजनीतिक स्वीकार्यता, खासकर महिलाओं व प्रगतिशील युवाओं में कमजोर हो सकती है। यूपी की राजनीति में बसपा के बाद दलितों का नया नेतृत्व तलाश रही जनता के सामने फिर से सवाल खड़ा हो सकता है।

SP_Singh AURGURU Editor